CFC से डेढ़ गुनी हो जाएगी ODOP से जुड़े शिल्पकारों की आय

एक ही छत के नीचे प्रोडक्ट तैयार करने की मिलेंगी सभी सुविधाएं

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लखनऊ: एक ही छत के नीचे सभी सुविधाएं मिलने से हुनर निखरने के साथ आय भी बढ़ेगी। ‘एक जिला, एक उत्पाद’ (ODOP) को लेकर सरकार की मंशा रंग लाने लगी है। कॉमन फैसिलिटी सेंटर्स (CFC) की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उम्मीद है कि जिन जिलों में सीएफसी (CFC) की स्थापना होगी, वहां एक ही छत के नीचे टेस्टिंग लैब, डिजाइन डेवलमेंट सेंटर, कच्चा माल, कॉमन प्रोडक्शन सेंटर, लॉजिस्टिक, पैकेजिंग, लेवलिंग और बारकोडिंग जैसी सभी सुविधाएं मिलने से, इससे जुड़े लोगों की आय में 25 से 50 फीसदी सेवा से डेढ़ गुना तक की वृद्धि होगी।

प्रशिक्षण की वजह से गुणवत्ता और दाम में उत्पाद प्रतिस्पर्धी (Competitive) बनेंगे। इससे और लोग भी अपनी परंपरा को समृद्ध करने के लिए आगे आएंगे। संभल में पशुओं की सींग से बटन बनते हैं। हॉर्न-बोन (सींग) के उत्पाद इस जिले का ओडीओपी भी है। तैयार बटन फिनिशिंग के लिए चीन भेजा जाता था। वहां से आने के बाद मांग के अनुसार इनका निर्यात होता था।

अब फिनिशिंग की मशीनें, बटन प्रोसेसिंग यूनिट और वुड सीजनिंग एंड एक्ससरी प्लांट वहां के सीएफसी में लग गई हैं। अनुमान है कि इससे वहां के कारीगरों की आय 25 से 50 फीसदी तक बढ़ जाएगी और प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से 1000 लोगों को रोजगार मिलेगा।

इसी तरह भगवान गौतमबुद्ध से जुड़ा कालानमक धान सिद्धार्थनगर का ओडीओपी है। वहां के सीएफसी में प्रसंस्करण मिल (Processing mill), नियंत्रित तापमान वाला गोदाम और वैक्यूम पैकेजिंग की सुविधा उपलब्ध होगी। इससे इसकी बिक्री निर्यात में चार गुना और खेती करने वाले किसानों की संख्या में 30 हजार तक की वृद्धि होगी।

एक ही छत के नीचे प्रशिक्षण से फिनिशिंग तक की सुविधाएं

ये कुछ उदाहरण इस बात के प्रमाण हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करीब ढाई साल पहले लांच की गई अपनी इस फ्लैगशिप योजना को लेकर कितने संजीदा हैं। एक ही छत के नीचे ओडीओपी योजना से जुड़े हुनरमंदों और अन्य लोगों को प्रशिक्षण से लेकर फिनिशिंग तक की सारी सुविधाएं मिले। इसके लिए सरकार की योजना हर जिले में सीएफसी बनाने की है। एक सीएफसी की लागत अधिकतम 15 करोड़ रुपये होगी। लागत का 90 फीसद हिस्सा सरकार वहन करेगी और बाकी संबंधित संस्था को करना होगा।

बता दें कि पिछले दिनो पहले मुख्यमंत्री ने ऐसे 13 केंद्रों का शिलान्यास किया। इनमें से अंबेडकर नगर, लखनऊ, बरेली, उन्नाव, आगरा, सीतापुर, सिद्धार्थनगर, संभल, वाराणसी, आजमगढ़ और सहारनपुर में एक-एक और मुरादाबाद में दो सीएफसी हैं।

6 महीने में ये केंद्र काम करना शुरू कर देंगे। अभी करीब डेढ़ दर्जन केंद्र और पाइपलाइन में हैं। इसके अलावा असिस्टेंस टू स्टेटस फॉर डेवलपमेंट ऑफ एक्सपोर्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड अदर्स एक्टीविटी स्कीम- एसाइड योजना के तहत बरेली की दो, फिरोजबाद, अमरोहा, आगरा और गौतमबुद्ध नगर के एक-एक सीफसी का लोकार्पण भी किया।

कौशिल विकास के लिए प्रशिक्षण की योजना

अपर मुख्य सचिव (लघु, सूक्ष्म एवं मध्यम उद्योग) नवनीत सहगल ने कहा कि उत्तर प्रदेश उत्कृष्ट हस्तशिल्प कला अपनी बेहद संपन्न परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। हर जिले का कोई उत्पाद अपनी खूबी के नाते वहां की पहचान है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की मंशा है कि समय के अनुसार, तकनीक की मदद से इन उत्पादों को गुणवत्ता और दाम में प्रतिस्पर्धी बनाया जाए, ताकि इससे जुड़े हर वर्ग को लाभ हो।

स्थानीय स्तर पर लोगों को रोजगार मिले और प्रदेश का समुचित विकास होगा। इसी मंशा से सीएफसी की स्थापना के साथ ब्रांडिंग, मार्केटिंग, क्रेडिट, फाइनेंस और संबंधित लोगों के कौशल विकास के लिए प्रशिक्षण के भी काम किए जा रहे हैं।

 

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