IIEST शिवपुर को मिला सोलर पीवी हब

सौर ऊर्जा की जरूरतों पर बात करते हुए डॉ. निशंक ने कहा, पूरा विश्व जलवायु परिवर्तन तथा ग्लोबल वार्मिंग जैसी दीर्घकालिक समस्याओं का सामना कर रहा है। ऐसे में हम सबकी जिम्मेदारी है कि हम इको फ्रेंडली तकनीकों और ऊर्जा के नवीन स्रोतों की तरफ अग्रसर हो।

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नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के द्वारा शिवपुर स्थित भारतीय अभियांत्रिकी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान(IIEST) में सोलर पीवी हब का उद्घाटन किया।
इस अवसर पर निशंक ने कहा, आईआईईएसटी शिवपुर, जिसे हम पहले बंगाल इंजीनियरिंग कॉलेज के नाम से जानते थे, 1856 से वैज्ञानिक सोच, समझ, ज्ञान और तकनीक को संरक्षित रखने एवं पोषित करने का कार्य बहुत जिम्मेदारी से कर रहा है।

संस्थान में सोलर हब के निर्माण से निश्चित रूप से सौर ऊर्जा गतिविधियों में संलग्न पूर्वी तथा उत्तर पूर्वी क्षेत्र में कई उद्योगों और अनुसंधान संगठनों को लाभ होगा।

सौर ऊर्जा की जरूरतों पर बात करते हुए डॉ. निशंक ने कहा, पूरा विश्व जलवायु परिवर्तन तथा ग्लोबल वार्मिंग जैसी दीर्घकालिक समस्याओं का सामना कर रहा है। ऐसे में हम सबकी जिम्मेदारी है कि हम इको फ्रेंडली तकनीकों और ऊर्जा के नवीन स्रोतों की तरफ अग्रसर हो।

साथ ही कार्बन उत्सर्जन को कम कर और फॉसिल फ्यूल पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए सौर ऊर्जा जैसे नए स्रोतों की तलाश करें एवं अनुसंधान और इनोवेशन के जरिए उन्हें कम लागत में समाज के लिए उपयोगी बनाएं।

केंद्रीय मंत्री ने आईआईईएसटी शिवपुर की उपलब्धियों के बारे में बताते हुए कहा, भारत का यह तीसरा इंजीनियरिंग कॉलेज 16 विभागों, आठ स्कूलों, 250 फैकेल्टी मेंबर्स तथा करीब 4000 छात्रों के साथ अनुसंधान और विकास के कार्यो में लगातार प्रगति के पथ पर अग्रसर है।

संस्थान ने बौद्धिक संपदा से संबंधित नियमों, पारदर्शी प्रशासन, व्यवसायीकरण, राजस्व निर्माण आदि के संबंध में अपने छात्रों, शिक्षकों, रिसर्च स्कॉलर आदि को जागरूक करने तथा नई खोजों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स सेल का निर्माण भी किया है। इस सेल ने पिछले दो दशकों में लगभग 60 के करीब पेटेंट फाइल किए हैं।

इस संस्थान का रिसर्च एंड कंसल्टेंसी सेल एक प्रमुख इनोवेशन केंद्र है। इसके माध्यम से संस्थान इंफोसिस, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, आईबीएम, टाटा स्टील, टीसीएस जैसे विभिन्न संस्थाओं के साथ प्रायोजित रिसर्च तथा कंसल्टेंसी कार्यों में भी बहुत गंभीरता के साथ आगे बढ़ रहा है। ऐसे कार्यों से इंडस्ट्री और एकेडमी के बीच के गैप को कम करने में काफी मदद मिलती है।

 

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