हरियाणा के मुख्यमंत्री से ‘अभद्रता’ पर अकाली दल के 9 विधायक नामजद

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को राज्य विधान परिषद परिसर में कथित तौर पर घेरने की कोशिश और उनके साथ 'अभद्रता' पर शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के 9 विधायकों को मंगलवार को नामजद किया गया।

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हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को राज्य विधान परिषद परिसर में कथित तौर पर घेरने की कोशिश और उनके साथ ‘अभद्रता’ पर शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के 9 विधायकों को मंगलवार को नामजद किया गया।
यह घटना 10 मार्च की है। ये विधायक सदन में केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे थे। बहरहाल, इस मामले में जिन विधायकों को नामजद किया गया है, उनमें विधायक दल के नेता शरणजीत सिंह ढिल्लों और पंजाब के पूर्व कैबिनेट मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया शामिल हैं।

भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं-186 (सार्वजनिक कार्यो के निर्वहन में लोक सेवक को बाधा डालने), 323 (जान-बूझकर चोट पहुंचाने की सजा) और 341 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

इससे पहले हरियाणा के स्पीकर ज्ञानी चंद गुप्ता ने मांग की कि शिअद अध्यक्ष सुखबीर बादल को उनकी पार्टी विधायकों द्वारा दुर्व्यवहार करने के लिए मुख्यमंत्री से माफी मांगनी चाहिए।

इस घटना के बारे में बताते हुए स्पीकर ने कहा था कि विधानसभा सत्र (पंजाब में) समाप्त होने के बाद अकाली दल के विधायक कारों में बैठे थे। हमारी कार्यवाही शाम लगभग 6.30 बजे समाप्त हो गई थी और मुख्यमंत्री मीडिया से बातचीत कर रहे थे। इसी बीच, वे अचानक आए। अपने वाहनों से बाहर निकले और उनके साथ दुर्व्यवहार करने लगे।

उन्होंने कहा कि इस तरह की घटना वास्तव में शर्मनाक है। “मैंने इस घटना पर पंजाब के स्पीकर (राणा के.पी. सिंह) से बात की और उन्होंने इसकी निंदा की और मुझे अपनी तरफ से मुख्यमंत्री से माफी मांगने के लिए कहा।”

शिअद विधायकों ने इस घटना के बाद एक बयान में कहा कि उन्होंने हमेशा किसानों के कल्याण के लिए आंदोलन किया है और वे हरियाणा में किसानों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के दमन के खिलाफ अपनी आवाज उठाना जारी रखेंगे, भले ही सरकार ने उनके खिलाफ 10 मामले दर्ज किए हों।

शरणजीत सिंह ढिल्लों ने कहा कि हरियाणा विधानसभा स्पीकर द्वारा धमकी दिए जाने और हमारे खिलाफ दर्ज किसी भी मामले से हम घुटने टेकने वाले नही हैं। हम किसानों के निमित्त जेल जाने के लिए भी तैयार हैं। हम हरियाणा सरकार की दमनकारी नीतियों के खिलाफ अपना आंदोलन जारी रखेंगे।

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