नवरात्रि में कलश स्थापना की है तो रखें इन 6 बातों का खास ध्यान

शारदीय नवरात्र की शुरुआत 17 अक्टूबर से हो रही है। नवरात्र में कलश स्थापना के साथ मां दुर्गा की विधि-विधान से पूजा अर्चना की जाती है। और श्रद्धालु व्रत भी रखते हैं। हर व्रत की तरह नवरात्र के व्रत के लिए भी कुछ नियम हैं, जिनका ध्यान रखना आवश्यक होता है।

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नवरात्र स्पेशल: शारदीय नवरात्र की शुरुआत 17 अक्टूबर से हो रही है। नवरात्र में कलश स्थापना के साथ मां दुर्गा की विधि-विधान से पूजा अर्चना की जाती है। और श्रद्धालु व्रत भी रखते हैं। हर व्रत की तरह नवरात्र के व्रत के लिए भी कुछ नियम हैं, जिनका ध्यान रखना आवश्यक होता है। अगर व्रत के नियमों का ध्यान न रखा जाए, तो उसका पूर्ण फल आपको प्राप्त नहीं होगा।  नवरात्रि व्रत से जुड़ी कुछ विशेष बातों का हमें ध्यान रखना होगा।

कन्याओं को दुखी न करें

हिंदू धर्म में कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप माना गया है। यही कारण है कि नवरात्रि में कन्या पूजन या कंजका पूजन की जाती है। माना जाता है नवरात्रि के दौरान किसी भी कन्या या महिला के प्रति असम्मान का भाव न आने दें। शास्त्रों में यहां तक कहा गया है कि यत्र नार्यास्तु पूजयंते रमंते तत्र देवता। किसी भी कन्या का दिल दुखाने या उनका अपमान करने पर मां दुर्गा नाराज हो सकती हैं।

घर में ताला बंद कर कहीं ना जाए।

अगर आपने घर में कलश स्थापना की है या माता की चौकी या अखंड ज्योति लगा की स्थपना की है तो घर को अकेला या खानी ना छोड़े। यानी घर में किसी न किसी सदस्य का होना बहुत जरूरी है। व्रत के दिनों में दिन में सोना भी वर्जित माना गया है।

वाद-विवाद से दूर रहें

नवरात्र के दौरानके किसी से झगड़ा न करें। वाद-विवाद से बचें। क्योंकि झगड़ा करने से व्रतधारी की आत्मा को दुख पहुंचता है, जिससे देवी मां रुष्ठ हो सकती हैं। श्रीराम चरित मानस में भी ऐसा कहा गया है कि “जहां सुमति तहां संपति नाना। जहां कुमति तहां विपति निदाना।।” लड़ाई झगड़े वाले घर में लक्ष्मी नहीं ठहरतीं।

धार्मिक कार्यों  में मन लगाएं

नवरात्रि के नौ दिनों तक अपना समय बेकार की बातों में न लगाकर धार्मिक ग्रंथों का पाठ करें। इन दिनों दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तसती का पाठ कर सकते हैं।

लहसुन-प्याज न खाएं।

नवरात्र के दिनों में सात्विक भोजन करें। इन दिनों प्याज, लहसुन और मांस मदिरा का सेवन ना करें। आहार, व्यवहार और विचार में आपके सात्विकता होना जरूरी है। तभी नवरात्रि के व्रत का पूरा लाभ मिल सकेगा।

काम वासना खुद को दूर रखें

नवरात्र के दिनों में काम भावना पर नियंत्रण रखना अतिआवश्यक है। इन दिनों में महिलाओं और पुरुष दोनों को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। मां की पूजा साफ मन से करने से ही मां प्रसन्न होती हैं।

 

 

 

 

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