हरियाणा नगरीय निकाय चुनावों के बाद हुड्डा की स्थिति हुई मजबूत

सूत्रों का कहना है कि केवल एक नगरीय निकाय में भाजपा की जीत ने संकेत दिया है कि शहरी क्षेत्रों में पार्टी के लिए समर्थन कम हो रहा है। लेकिन, एक पार्टी के रूप में कांग्रेस अभी भी सरकार को अस्थिर करने की स्थिति में नहीं है, जब तक कि जेजेपी भाजपा के साथ है।

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नई दिल्ली: हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने नगरीय निकाय चुनाव और हाल ही में बरोदा विधानसभा उपचुनाव में जीत के बाद कांग्रेस में अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। दोनों ही जीत राज्य के सोनीपत क्षेत्र में मिली है, जो हुड्डा का गढ़ है।

सूत्रों का कहना है कि केवल एक नगरीय निकाय में भाजपा की जीत ने संकेत दिया है कि शहरी क्षेत्रों में पार्टी के लिए समर्थन कम हो रहा है। लेकिन, एक पार्टी के रूप में कांग्रेस अभी भी सरकार को अस्थिर करने की स्थिति में नहीं है, जब तक कि जेजेपी भाजपा के साथ है।

सत्तारूढ़ भाजपा-जेजेपी गठबंधन दो नगर निगमों में मेयर चुनाव हार गया, लेकिन बुधवार को एक नगरीय निकाय में जीत हासिल की। सोनीपत नगर निगम में विपक्षी कांग्रेस ने मेयर पद पर जीत दर्ज की, जबकि पंचकूला नगर निगम में भाजपा ने इस पद पर जीत हासिल की।

अंबाला नगर निगम में जीत विनोद शर्मा की हरियाणा जन चेतना पार्टी की हुई। शर्मा ने 2013 में कांग्रेस पार्टी छोड़ दी थी और अपनी पार्टी बनाई थी। हरियाणा जन चेतना पार्टी की शक्ति रानी शर्मा ने चुनाव में भाजपा की वंदना शर्मा को लगभग 7,000 मतों के अंतर से हराया।

भाजपा के कुलभूषण गोयल ने कांग्रेस की उपिंदर कौर अहलूवालिया को 2,057 वोटों के अंतर से हराकर पंचकूला मेयर का चुनाव जीता। गोयल को 49,860 वोट मिले, जबकि अहलूवालिया को 47,803 वोट मिले। मेयर की सीट के लिए कांग्रेस के निखिल मदान ने सोनीपत में भाजपा के उम्मीदवार ललित बत्रा को 13,818 वोटों से हराया।

 

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