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यूपी 140 एमजीडी गंगाजल दिल्ली को बतौर पेयजल देने को तैयार

दिल्ली में गंगा का पानी पेयजल के लिए उपलब्ध कराया जा सकता है। दिल्ली में पेयजल आपूर्ति के लिए उत्तर प्रदेश द्वारा दिल्ली को गंगा का 140 एमजीडी (मिलियन गैलन डेली) अतिरिक्त पानी उपलब्ध कराने का प्रस्ताव दिया गया है।

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नई दिल्ली: दिल्ली में गंगा का पानी पेयजल के लिए उपलब्ध कराया जा सकता है। दिल्ली में पेयजल आपूर्ति के लिए उत्तर प्रदेश द्वारा दिल्ली को गंगा का 140 एमजीडी (मिलियन गैलन डेली) अतिरिक्त पानी उपलब्ध कराने का प्रस्ताव दिया गया है। हालांकि इसके बदले दिल्ली जल बोर्ड को यूपी में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराना होगा। वहीं गंगा का पानी दिल्ली तक लाने का सारा खर्च भी दिल्ली सरकार को उठाना होगा।

उत्तर प्रदेश को सिंचाई का पानी दिल्ली के सीवर ट्रीटमेंट प्लांट्स द्वारा शोधित जल के रूप में उपलब्ध कराया जाएगा।

गंगाजल को दिल्ली में लाने की परियोजना पर दो हजार करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। यह खर्च दिल्ली जल बोर्ड को उठाना होगा। दिल्ली जल बोर्ड को यह प्रस्ताव उत्तर प्रदेश के अधिकारियों ने प्री-फीजिबिलिटी रिपोर्ट में दिया है। दिल्ली जल बोर्ड के मुताबिक, उत्तर प्रदेश से एक प्री-फीजिबिलिटी रिपोर्ट मिली है। इसके तहत दिल्ली जल बोर्ड को पेयजल के लिए उत्तर प्रदेश के मुरादनगर से सोनिया विहार तक पाइप लाइन डालनी होगी।

दिल्ली और उत्तर प्रदेश के बीच 140 एमजीडी गंगाजल के लिए बातचीत चल रही है। दिल्ली को मिलने वाले गंगाजल के बदले दिल्ली जल बोर्ड उत्तर प्रदेश को 140 एमजीडी सीवरेज का उपचारित पानी आगरा नहर के जरिये उपलब्ध कराएगा। फिलहाल यह चर्चा तकनीकी स्तर पर अधिकारियों के बीच जारी है।

दिल्ली जल बोर्ड करीब 935 एमजीडी पानी की आपूर्ति करता है। जबकि दिल्ली को 1200 एमजीडी पानी की जरूरत है। दिल्ली में 265 एमजीडी पानी की कमी है। वहीं, दूसरी तरफ सीवरेज शोधन से करीब 500 एमजीडी पानी उपलब्ध है। इसमें से 90 एमजीडी पानी का इस्तेमाल ही गैर घरेलू कार्यो में हो पाता।

शोधित जल को लेकर दिल्ली सरकार के मंत्री सत्येंद्र जैन का कहना है कि सरकार का मुख्य ध्यान उपचारित पानी के इस्तेमाल पर होगा। उपचारित पानी एक बहुत ही महत्वपूर्ण संसाधन है जो लंबे समय से उपेक्षित है। दिल्ली जल बोर्ड पानी के शोधन और उसके पुन उपयोग को बढ़ाने में कोई कमी नहीं छोड़ेगा। उपचारित पानी के इस्तेमाल से पीने योग्य पानी की उपलब्धता को लेकर दिक्कत कम होगी।

दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष राघव चड्ढ़ा ने यमुना नदी के जल स्तर पर कहा, यमुना का लगातार घटता जल-स्तर चिंता का विषय है। हम हरियाणा सरकार से भी लगातार सहयोग की मांग कर रहे हैं, हमें उम्मीद है कि जल्द ही इसका कोई समाधान निकलेगा।

पानी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए जल बोर्ड 30 दिनों के भीतर रेन वाटर हार्वेस्टिंग के 200 स्ट्रक्च र भी चिन्हित करेगा। दिल्ली जलबोर्ड उन सभी आरडब्लूए, कॉलेज, होटल या हास्पिटल से संपर्क करेगा, जहां पर ये स्ट्रक्चर लगने हैं। दिल्ली जल बोर्ड हर जोन से 5 ऐसी जगहों को चिन्हित करेगा, जहां वर्षाजल संचय ढांचा लगाया जा सकता है।

दिल्ली जल बोर्ड के मुताबिक, छोटे शॉपिंग मॉल्स में भी वर्षाजल संचय ढांचा लगाया जा सकता है। यहां तक कि मार्केट एसोसिएशन भी ऐसे ढांचे बनाने पर काम कर सकती हैं। औद्योगिक क्षेत्रों के संगठन भी ऐसे काम कराने में काफी उत्साह दिखाएंगे।

 

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