Twin Tower Demolition Impact: ट्विन टावर के जमींदोज होने के बाद बिगड़ा वातावरण का मिजाज, बरतें यह सावधानी

Twin Tower Demolition Impact: ट्विन टावर गिरने बाद उठा धूल, मिट्टी और गैसों का गुबार, आसपास के लोग बरतें सावधानी

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Twin Tower Demolition Impact: आखिरकार भ्रष्टाचार की नींव पर खड़ा ट्विन टावर बीते 28 अगस्त के दिन रविवार को दोपहर 2:30 बजे जमींदोज हो गया। टावर को गिराने की प्रक्रिया उसी के अनुसार पूरी की गयी जैसा पहले से तय किया गया था। ट्विन टावर को गिराते वक्त किसी भी तरह के जानमाल का कोई नुकसान नहीं हुआ।

लेकिन इतनी बड़ी इमारत के धराशाई होने के बाद उससे निकले धुल, मिट्टी और गैसों के गुबार ने आपसाप के इलाके के वातावरण को प्रदूषित जरूर कर दिया है। हालांकि टावर को गिराने से पहले आसपास की इमारतों में रह रहे लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया था लेकिन फिर भी लोगों के स्‍वास्‍थ्‍य के लिए अगले कुछ दिनों तक खतरा अभी टला नहीं है।

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Twin Tower Demolition Impact: क्या कहते हैं डॉक्टर्स

Twin Tower Demolition Impact
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आपको बता दें, इस मामले पर डॉक्टर्स का कहना है कि जब भी इस तरह से किसी भी इमारत को गिराया जाता है तब उस इमारत को बनाने में लगे सीमेंट, रेत और लोहे की वजह से मलबे से कई खतरनाक निकलती है जो 300 से 400 मीटर के एरिया में ऑक्सीजन लेवल को काफी कम कर देती है। जो बच्चों समेत स्वास के रोगियों के लिए काफी खतरनाक साबित होते हैं।

इसके साथ ही धूल के छोटे-छोटे कण भी काफी समय कर हवा में रहते हैं जो आंखों के लिए खासतौर पर हानिकारक होते हैं। साथ ही फफड़ों पर भी इन कड़ों और हानिकारक गैसों का बुरा असर पड़ता है। ऐसे में डॉक्टरों के मुताबिक अगले 10 से 15 दिन विशेष सावधानी बरतनी के जरूरत है।

Twin Tower Demolition Impact: मलबे से निकलते हैं जहरीले गैस

Twin Tower Demolition Impact
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एक्सपर्ट्स का मानना है कि किसी भी इमारत के गिरने के बाद धूल के कड़ों के साथ साथ कार्बन मोनोऑक्साइड, कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रस ऑक्साइड, सल्फर डाई ऑक्साइड, नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड जैसी गैस निकलती है जो सेहत पर बुरा असर डालती है। इन जहरीली गैसों की वजह से लोगों में बेचैनी, सांस लेने जैसी समस्या हो सकती है।

Twin Tower Demolition Impact: बरतें यह खास सावधानी

ऐसे में कुछ विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। बीपी, शुगर, अस्थमा या सांस के मरीजों को कुछ दिनों तक ऐसे महौल से दूर रखें। अपने शरीर को अच्छी तरह से हाइड्रेट रखें और ताजे फल खाते रहें साथ ही चेहरे को पानी से दिन में 3 से 4 बार अच्छे से धोएं। सीओपीडी या फेफड़ों से संबंधित अन्य बीमारी से पीड़ित मरीज अपने इनहेलर्स का यूज करते रहें। गले में खराश, खांसी, बुखार आंखों में जलन हो तो फौरन डॉक्टर को दिखाए।

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