Tripura Violence Case: त्रिपुरा हिंसा मामले में दिल्ली से गईं दो महिला पत्रकारों पर FIR दर्ज

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Tripura Violence Case: दिल्ली से त्रिपुरा गईं दो महिला पत्रकारों पर एफआईआर दर्ज की गई है। दोनों महिला पत्रकारों पर यह आरोप है कि उन्होंने राज्य में सांप्रदायिक तनाव भड़काने का काम किया है। एफआईआर दर्ज होने के बाद त्रिपुरा पुलिस ने दोनों महिला पत्रकारों को राज्य छोड़ने से मना कर दिया है।

Tripura Violence Case

Tripura Violence Case:  महिला पत्रकारों ने पुलिस पर डराने-धमकाने का आरोप लगाया

जानकारी के मुताबिक विश्व हिंदू परिषद की शिकायत के बाद त्रिपुरा में दो महिला पत्रकारों को एफआईआर में नामजद किया है। इधर, महिला पत्रकारों ने पुलिसकर्मियों पर डराने-धमकाने का संगीन आरोप लगाया है।

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दोनों पत्रकारों की पहचान समृद्धि सकुनिया और स्वर्णा झा के रूप में हुई है। त्रिपुरा पुलिस ने उन्हें बयान दर्ज करने के लिए नोटिस थमाया है। बता दें कि दोनों पत्रकार कथित सांप्रदायिक तनाव को कवर करने के लिए गुरुवार को दिल्ली से यहां पहुंची थी। वहीं महिला पत्रकारों ने पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके होटल में आई और उन्हें डराया-धमकाया गया। दोनों पर धार्मिक आधार पर दो समूहों के बीच उकसान फैलाने का आरोप लगा है।

Tripura Violence Case: विहिप नेता कंचन दास ने महिला पत्रकारों पर दर्ज कराई एफआईआर

जानकारी के मुताबिक विहिप नेता कंचन दास की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत पर पुलिस ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया है। दोनों पत्रकार अब पुलिस की हिरासत में है। पत्रकारों पर धारा 153-ए के तहत “धर्म के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने” और आईपीसी (भारतीय दंड संहिता) की धारा 120 (बी) के तहत “आपराधिक साजिश का हिस्सा होने” का आरोप लगाया गया है। सूत्रों ने बताया कि इन दोनों से फर्जी न्यूज सर्कुलेशन मामले में पूछताछ हो सकती है।

Tripura Violence Case: गृह मंत्रालय ने राज्य में मस्जिद में तोड़फोड़ की खबरों को फर्जी करार दिया

शनिवार को गृह मंत्रालय ने भाजपा शासित राज्य में एक मस्जिद में तोड़फोड़ की खबरों को खारिज कर दिया। कड़े शब्दों में दिए गए एक बयान में कहा गया है, ‘ऐसी खबरें आई हैं कि त्रिपुरा में गोमती जिले के काकराबन इलाके में एक मस्जिद को क्षतिग्रस्त किया गया है।

ये खबरें फर्जी हैं और तथ्यों को पूरी तरह गलत तरीके से पेश किया गया है।’ बता दें कि हाल ही में एक दर्जन से अधिक आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं और सुप्रीम कोर्ट के वकीलों, कार्यकर्ताओं और धार्मिक प्रचारकों सहित 70 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।

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