आज है अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस, इस दिन से जुड़ी कुछ रोचक जानकारी

हर 1 मिनट में होता है 23 बच्चियों का बाल विवाह, आज चलाई जाती है सेव गर्ल चाइल्ड मुहिम।

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International girls day: आज 11 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के रुप में मनाया जाता है। आज के दिन दुनिया भर में बालिकाओं के उत्थान और सशक्तिकरण के लिए तमाम सारे प्रयास किए जाते हैं। आज की स्थिति की बात करें तो देश ही नहीं दुनिया में भी लड़कियों की हालत चिंताजनक बनी हुई है। आज भी उनके खिलाफ अपराध और शोषण कम होता नजर नहीं आ रहा है।

आज से जुड़ी कुछ रोचक जानकारी:

यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार पूरी दुनिया में हर एक मिनट पर 23 बच्चियों का बाल विवाह हो रहा। ऐसे में देशभर में  अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर , विश्व भर में सेव गर्ल्स चाइल्ड मुहिम चलायी जा रही है भारत में इसे “बेटी बचाओ तथा बेटी पढ़ाओ” के नाम से जाना जाता है।
अगर ऐसा ही रहा तो 2030 तक विश्व भर में 18 साल से कम विवाहित लड़कियों की संख्या 15 करोड़ से ज्यादा हो जाएगी।

अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस का शुरुआत

11 अक्टूबर 2012 से इसकी शुरुआत की गई थी।
जिसका उद्देश्य लड़कियों की शिक्षा,लैंगिक समानता, पोषण, कानून का अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा, और हिंसा को रोकना और आत्मनिर्भर तथा जागरूक बनाना है।

कनाडा ने शुरुआत की मुहिम

कनाडा के एक गैर सरकारी संगठन “प्लान इंटरनेशनल” ने परियोजना के रूप में मुहिम की शुरुआत की।
इस योजना को अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधि करने के लिए तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता बढ़ाने के लिए कनाडा सरकार ने यूनिसेफ से संपर्क किया साथ ही इस मुहिम “प्लान इंटरनेशनल” को संयुक्त राष्ट्र संघ में शामिल किया।

संयुक्त राष्ट्र महासभा में कनाडा द्वारा अंतर्राष्ट्रीय दिवस को औपचारिक रूप से एक प्रस्ताव के रूप में प्रस्तावित किया गया था। रोना एम्ब्रोस , महिलाओं की स्थिति के लिए कनाडा की मंत्री ने प्रस्ताव प्रायोजित किया, महिलाओं और लड़कियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने 55 वें संयुक्त राष्ट्र आयोग में महिलाओं की स्थिति पर पहल के समर्थन में प्रस्तुतियाँ दीं । 19 दिसंबर, 2011 को, संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 11 अक्टूबर, 2012 को लड़कियों के उद्घाटन दिवस के रूप में गोद लेने के प्रस्ताव को पारित करने के लिए मतदान किया। संकल्प में कहा गया है कि लड़कियों का दिन पहचानता है।

 

थीम पर आधारित होता है दिवस

पहला, 2012 में “बाल विवाह समाप्त करना” था, दूसरा, 2013 में, “लड़कियों की शिक्षा के लिए नवाचार” था, तीसरा, 2014 में, “किशोर लड़कियों को सशक्त बनाना: हिंसा के चक्र को समाप्त करना” था , और चौथा, 2015 में, ” द पॉवर ऑफ़ एडोल्सेंट गर्ल: विज़न फॉर 2030 था।” 2016 विषय था “गर्ल्स ‘प्रगति = लक्ष्य’ प्रगति क्या गिनता लड़कियों के लिए,”  2017 विषय था “सशक्त लड़कियों: पहले, दौरान और बाद संकट ,” और 2018 के लिए विषय उसके साथ “था: एक कुशल लड़की सेना। ” 2019 में GirlForce: Unscripted and Unstoppable.
2020 का विषय है “हमारी आवाज और हमारा समान भविष्य” है।

दुनियाभर में बच्चियों की स्थिति

1.2 करोड़ बच्चियों की शादी हर साल पूरी दुनिया में हो जाती है।

यूनिसेफ के अनुसार वर्ल्ड लेवल पर प्रत्येक पांच में से एक लड़की 21 परसेंट की शादी 18 वर्ष की उम्र से पहले कर दी जाती है। 10 साल पहले यही आंकड़ा 25 परसेंट था।

दक्षिण एशिया में बाल विवाह में पर्याप्त कमी आई है इसमें भारत भी शामिल है वहीं कम विकसित देशों में यह आंकड़ा 40 परसेंट तक देखने को मिला है।

2006 -16 के दौरान पूरी दुनिया में 2.5 करोड़ बाल विवाह रोके गए हैं।

एक दशक पहले वैश्विक स्तर पर 20-25 %परसेंट बच्चों का बचपन में ही विवाह हो जाता था मगर इसमें 15 %कमी आई है।

यूनिसेफ के मुताबिक मौजूदा समय में हर साल 12 मिलियन लड़कियों की बचपन में शादी कर दी जाती है।

साउथ एशिया में बदतर स्थिति

यूनिसेफ के आंकड़े बताते हैं कि साउथ एशिया और बांग्लादेश में क्रमश 22% और पर्सेंट लड़कियां ऐसी हैं जिनका क्रमश से 15 और 18 साल की उम्र से पहले शादी कर दी जाती है।

भारत में 15 वर्ष की उम्र से पहले विवाह की जाने वाली लड़कियों की दर 7% है।

सबसे ज्यादा खराब दर वाला देश निजर है जहां करीब 76% लड़कियों की शादी 18 साल से पहले और 28 परसेंट की शादी 15 साल उम्र पूरी होने से पहले कर दी जाती है।

भारत के 3 राज्यों में बुरे हालात

रिपोर्ट के अनुसार भारत के 3 राज्यों में बाल विवाह के मामले ज्यादा पाए गए हैं।

इन राज्यों में बिहार पश्चिम बंगाल और राजस्थान आगे हैं।

वहीं तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों में 20% से भी नीचे हैं।

अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर “डॉ अदिति डे “

“बच्चियों के प्रति समाज को अपनी सोच की नकारात्मकता को बदलना चाहिए. बेटियों की जल्दी से शादी के बजाय उन्हें खुद को साबित करने का मौका मिलना चाहिए”।

अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस की सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। बेटियां हमारी संस्कृति और विरासत की ध्वजवाहक हैं। आइयें, हम सृष्टि के सर्वोत्तम उपहार बेटियों के प्रति समाज में व्याप्त भ्रांतियों को मिटाते हुए उनके उत्थान व कल्याण का संकल्प लें।

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