उत्तराखंड: आज है चंपावत जिले का 23 वां स्थापना दिवस, जाने क्या है यहां खास

15 सितंबर 1997 को तत्कालीन उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती के प्रयासों के बाद पिथौरागढ़ जिले से अलग कर चंपावत जिले का गठन किया गया था

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चम्पावत– उत्तराखंड राज्य का जनसंख्या और क्षेत्रफल के लिहाज से सबसे छोटा जिला, पर ऐतिहासिक दृष्टि से सबसे समृद्ध जिलों में से एक चंपावत आज अपनी स्थापना की 23वीं वर्षगांठ मना रहा है। 15 सितंबर 1997 को तत्कालीन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मायावती (Mayavati) के प्रयास के बाद पिथौरागढ़ जिले (Pithoragarh) से अलग कर चंपावत जिले (Champawat Dist) का गठन किया गया था। इस जिले में कुल चार तहसील और 13 जिला पंचायत क्षेत्र हैं। उत्तराखंड के सबसे कम आबादी वाला जिला चंपावत अपने पर्यटन और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए जाना जाता है।

उत्तराखंड के इतिहास में चंपावत जिले का खास महत्व है मध्यकालीन इतिहास में राजा सोमचंद (Somchand) ने चंपावत में अपनी राजधानी का निर्माण किया था। जिसके बाद काफी लंबे समय तक चंद वंश का राज चंपावत से ही चला। जिसे उस वक्त कुमूं या काली कुमूं भी कहा जाता था। इसी जगह के नाम पर उत्तराखंड के इस मंडल का नाम कुमाऊं (Kumaun) पड़ा। उस दौर के किलों के अवशेष अभी यहां देखे जा सकते हैं। ब्रिटिश काल में भी चंपावत को तहसील का दर्जा प्राप्त था उस दौरान यह अल्मोड़ा (Almora) जिले में शामिल था 1972 में चंपावत को अल्मोड़ा से काटकर पिथौरागढ़ जिले में शामिल कर लिया गया।

क्या है चम्पावत में

मौजूदा समय में चम्पावत में चार तहसील (चंपावत Champawat, लोहाघाट Lohaghat, पाटी Pati और पूर्णागिरि Purnagiri) एक उप तहसील (बाराकोट) 4 विकासखंड (लोहाघाट, बाराकोट, चंपावत टनकपुर), 13 जिला पंचायत क्षेत्र हैं। जिले में चंपावत और लोहाघाट नाम से 2 विधानसभा की सीट चंपावत हैं। लोकसभा क्षेत्र के लिए यह अल्मोड़ा लोकसभा सीट के अंतर्गत ही आता है।

धार्मिक स्थल

चंपावत जिले में नेपाल बॉर्डर से लगा हुआ मां पूर्णागिरि धाम है। जहां देश के कोने-कोने से श्रद्धालु आते हैं और हर वर्ष यहां पर मां पूर्णागिरि का मेला भी लगता है।

सिक्खों का पवित्र धार्मिक स्थल रीठा साहिब (Reetha Sahib) चंपावत जिले के प्रसिद्ध धार्मिक और पर्यटक स्थलों में से हैं। जो मीठे मीठे के लिए देश भर में प्रसिद्ध है।

 

चंपावत का ऐतिहासिक पौराणिक रूप से भी काफी अधिक महत्व है। कहा जाता है कि भगवान विष्णु (Lord Vishnu) ने अपना कूर्म अवतार चंपावत में ही लिया था। जिस कारण से इसका नाम कुमाऊं पड़ा जो पहले कुर्मांचल हुआ करता था। यहां सात प्रसिद्ध मंदिर हैं जिनके नाम बालेश्वर, क्रान्तेश्वर, ताड़केश्वर, ऋषेश्वर, डिक्टेश्वर, मल्लाड़ेश्वर तथा मानेश्वर हैं।

पर्यटन कीसंभावनाएं

बालेश्वर मंदिर

पर्यटन के लिहाज से चंपावत जिले में काफी संभावनाएं हैं। यहां चंपावत जिला मुख्यालय के समीप ही ऐतिहासिक बालेश्वर मंदिर (Baleshwar Temple) है, जोकि अत्यंत दर्शनीय है। मध्यकालीन निर्माण कला और स्थापत्य कला का बेहतरीन नमूना है बालेश्वर मंदिर।

एबट माउंट

चंपावत जिला मुख्यालय से 13 किलोमीटर दूरी पर लोहाघाट नगर स्थित है। उसी के समीप करीब 8 किलोमीटर दूरी पर समुद्र तल से 2000 मीटर की ऊंचाई पर बसा है एबट माउंट (Abbot Mount)। वहां ब्रिटिश काल की कोठियां, चर्च और बड़ा खेल का मैदान है। वहां से हिमालय दर्शन भी 360° में कर सकते हैं।

मायावती आश्रम

लोहाघाट से ही 9 किलोमीटर की दूरी पर स्वामी विवेकानंद द्वारा स्थापित मायावती आश्रम (Mayavati Ashram) है। जहां अध्यात्म और स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda) की प्रेरणा से बना एक सुंदर आश्रम और प्रकृति का बेहद रमणीय समागम मिलता है।

 

– Jugal kishor

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