Article of this week

Article of this week: छल-कपट से भरा व्यक्ति मोक्ष की मंजिल को प्राप्त नहीं कर सकता

“सरल सुभाव न मन कुटिलाई। जथा लाभ संतोष सदाई” तुलसीदास जी कहते हैं कि, कहहु भगति पथ कवन प्रयासा। जोग न मख जप तप उपवासा। सरल सुभाव न मन कुटिलाई। जथा लाभ संतोष सदाई।। भावार्थ कहो तो, भक्ति मार्ग में कौन-सा परिश्रम है? इसमें न योग की आवश्यकता है, न यज्ञ, जप, तप और उपवास…

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