Struggle Story Of Ruqaiya: कहानी रुकैया परवीन की, जिसे सालों से है इंसाफ की दरकार

Struggle Story Of Ruqaiya: घरेलू हिंसा के खिलाफ रुकैया ने उठाई है आवाज

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Struggle Story Of Ruqaiya: नारी सम्मान की अधिकारी, नारी समानता की अधिकारी और भी ना जाने कितने अधिकार हैं जो उसे मिलने चाहिए, मगर समाज के बनाए गये नियम कानून ‘आधी आबादी’ को वो हिस्सा कभी देना ही नहीं चाहते। साल के एक दिन महिला दिवस की खुशियां होती हैं, तो बाकी 364 दिन, भूण हत्या से लेकर दहेज हत्या और बलात्कार तक की खबरों का मातम।

संघर्ष कई तरह के होते हैं, एक वो संघर्ष जिसमें सफल होने पर दुनिया को उस सफलता की कहानी सुनाई जाती है, लेकिन एक संघर्ष ऐसा भी होता है जो अपने आत्म सम्मान, अपने हक और अपने अधिकारों के लिए किया जाता है। आज ऐसी ही एक संघर्ष की कहानी हम आपको बताने जा रहे हैं, जो है लखनऊ की रहने वाली रुकैया परवीन की।

रुकैया परवीन को करीब 30 साल होने को आए, घरेलू हिंसा, दहेज प्रताड़ना, और तलाक जैसी परेशानियों से जूझते हुए, मगर उनका संघर्ष आज भी अनवरत जारी है।

Struggle Story Of Ruqaiya: 2007 में बिगड़े रुकैया के हालात

Struggle Story Of Ruqaiya
Struggle Story Of Ruqaiya

रुकैया परवीन की शादी 1922 में तोपखाना कैंट में रहने वाले इलियास के साथ हुई थी, मगर शादी के कुछ वक्त बाद ही ससुराल वाले उन्हें दहेज के लिए प्रताड़ित करने लगे, कुछ समय बाद पता चला कि पति अय्याश और अपराधी प्रवृति का शख्स है। जब रुकैया ने अपने पति को गलत कामों से रोका पति इलियास ने रुकैया का ऐसा हाल कर दिया जिसे देख किसी की भी रुह कांप जाए।

लेकिन इन सबके बीच 5 बच्चों की मां बन चुकी रुकैया के पास इस जुल्म को सहने के सिवा और कोई चारा नहीं था। साल 2007 में हालात इस वक्त और ज्यादा बिगड़ गए जब रुकैया और उनके दो बच्चों को मारपीट कर घर से निकाल दिया गया, और बाकी 3 बच्चे घर में कुपोशित हालत में मिले, जिन्हें ससुराल वालों ने मां को नहीं सौंपा बल्कि उन्हें अनाथ आश्रम पहुंचा दिया।

तब से लेकर अब तक रुकैया परवीन ने किसी तरह अपने पांचों बच्चों को मां-बाप बनकर पाला है, शिक्षा और संस्कार दिए हैं। हालांकि रूकैया परवीन की ये कहानी यहीं खत्म नहीं होती। साल 2011 में घरेलू हिंसा का मुकदमा जीतने के बाद 2015 में बहुत जद्दोजहद के बाद  उन्हें, ससुराल के घर में वो कमरा वापस मिला जहां वो शादी करके आईं थीं, लेकिन तब से ही रुकैया का पति लापता है, ठिकाने बदल-बदल कर अलग-अलग जगहों पर रहता है, जिसका किसी को पता नहीं।

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Struggle Story Of Ruqaiya: कोर्ट में चल रहा है केस

कोर्ट में तारीख पर हाजिरी नहीं और बहाना बीमारी का। ऐसी बीमारी जैसे कभी लकवा का मरीज तो कभी पैरों से खुद को लाचार दिखाता है। ससुराल और पति की तरफ से महंगे और रसूखदार वकील झूठे गवाहों की फौज खड़ी करते हैं, नतीजा रुकैया को आज भी इंसाफ की दरकार है। मुआवजे की रकम तो दूर बच्चों का राशन और फीस के पैसे का इंतजाम भी रुकैया ने जैसे-तैसे छोटे मोटे काम करके पूरा करती हैं।

2021 में हालात सुधरने की बजाय और बिगड़ गए जब ससुराल वालों ने एक बार फिर से प्रताड़ित करना शुरु किया, पहले जिस टीन शेड में रुकैया अपने पांच बच्चों के साथ रहती थी वहां की लाइट कटवा दी, और अब तरह-तरह से डराकर दबाव इस बात का बनाया जा रहा है कि  वो घर छोड़कर चली जाए। लेकिन एक औरत और सबसे बढ़कर एक मां का जज्बा ही है कि रुकैया आज भी अन्याय के खिलाफ अकेले लड़ रही हैं।

कहने को तो हम 21वीं सदी में है, दुनिया मंगल पर पहुंच रही है, मगर रुकैया जैसी ना जाने कितनी ही औरतें आज भी एक जंग लड़ रही हैं, जंग इस समाज के बनाए गये गलत नियमों से, और जंग उस कानून से भी है जिसमे न्याय देने की रफ्तार इतनी धीमी होती है कि किसी की पूरी उम्र ही निकल जाए।

तो ये थी कहानी रुकैया परवीन की, जो हमारे सभ्य समाज का वो चेहरा दर्शाती है जो बदरंग है, लाचार है, बेबस है। बहुत ज्यादा जरूत है आज के वक्त में उन महिलाओं के लिए आवाज को बुलंद करने की जो अपने ऊपर हो रहे जुल्म के खिलाफ आवाज उठाती हैं, क्योंकि तभी हम अपनी ‘आधी आबादी’ को उसका असली हक दिला पाएंगे, और यही सही मायने में महिला दिवस होगा।

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