..शराफत से खड़े रहो , यह पुलिस स्टेशन है, तुम्हारे बाप का घर नहीं

सदी के महानायक अमिताभ बच्चन आज अपना 78वा जन्मदिन मना रहे हैं ।

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” जब तक बैठने को ना कहा जाए तब तक चुपचाप शराफत से खड़े रहो , यह पुलिस स्टेशन है, तुम्हारे बाप का घर नहीं ।” फिल्म जंजीर का यह डायलॉग आज किसकी जुबान पर जस का तस नहीं है । यह संवाद अमिताभ बच्चन और उस मूवी में शेर खान का किरदार निभा रहे प्राण के बीच हुआ था। यह फिल्म अमिताभ बच्चन के करियर में मील का पत्थर साबित हुई थी जिसने अमिताभ बच्चन को सुपरस्टार बनाया। क्योंकि कैरियर की शुरुआत में ही अमिताभ बच्चन को अपनी बारह फिल्मों में असफलता की कड़वी स्वाद चखनी पड़ी थी। अमिताभ को उनकी भारी आवाज के कारण उन्हें ऑल इंडिया रेडियो से भी रिजेक्शन मिल गया था।

लेकिन साल 1973 उनके जीवन में खुशियों का सौगात लेकर आया। थक हार कर चल रही जिंदगी एकदम से जैसे गतिमान हो गई। यह वही साल था जिसने अमिताभ के लिए आगे का मार्ग प्रशस्त किया। इस साल पर हम इतनी जोर इसलिए डाल रहे हैं क्योंकि इसी साल रिलीज हुई थी फिल्म, जंजीर जिसने अमिताभ के मृतप्राय जीवन में एकदम से जान फूंक दी थी। इस फिल्म के बाद अमिताभ ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और साल दर साल वे ऊंचाइयों का नया कीर्तिमान स्थापित करते गए। आज अमिताभ बच्चन अपने कैरियर के उस मुकाम पर है जहां हर कोई उनका मुरीद है। वह हर पीढ़ी के पसंदीदा हैं।

 

साल में दो बार जन्मदिन मनाते हैं अमिताभ बच्चन

 

सदी के महानायक अमिताभ बच्चन का जन्म यूं तो आज ही के दिन यानी 11 अक्टूबर को ही 1942 में हुआ था लेकिन अमिताभ बच्चन हर साल 2 बार अपना जन्मदिन मनाते हैं। इसके पीछे एक खास वजह है।

1982 में फिल्म कूली के शूटिंग के दौरान एक ऐसा हादसा हुआ था जिसमें अमिताभ बच्चन को गंभीर चोट आई थी। एक एक्शन सीन था, जिसे अमिताभ के डुप्लीकेट पर फिल्माया जाना था लेकिन अमिताभ ने इसे खुद करने का निर्णय लिया। इस सीन में उनके सामने थे प्रसिद्ध अभिनेता पुनीत इस्सर जिनको अमिताभ के पेट में एक पंच मारनी थी। इस सीन को शूट करते वक्त अमिताभ को काफी चोट आई। उनका तिल्ली फट गया। उनके शरीर से ढेर सारा खून बहने लगा। तब अमिताभ को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। काफी इलाज के बाद भी अमिताभ की हालत नाजुक ही बनी रही। कहा जाता है कि उस समय अमिताभ कुछ मिनटों के लिए एकदम से मृतक समान हो गए थे। बाद में डॉक्टरों द्वारा इंजेक्शन देने के बाद उन्हें होश आया।

 

इस हादसे के उबरने के बाद लोग इसे अमिताभ का दूसरा जन्म ही मानते हैं। और इस तरह से 2 अगस्त को भी उनका एक जन्मदिन मनाया जाता है।

वर्ष 1978 में उनकी फिल्म रिलीज हुई थी , डॉन।इसमें उनकी भूमिका को काफी सराहा गया था। यह फिल्म इतनी प्रचलित हुई थी कि शाहरुख खान ने भी इसी पर आधारित और इसी नाम से फिल्में बना डाली। अमिताभ और शाहरुख दोनों की फिल्मों में ” खाई के पान बनारस वाला” गाना है लेकिन यह गाना जो अमिताभ के फिल्म में है उसे किशोर कुमार ने गाया था और वह गाना एवरग्रीन है।

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