चाइल्ड होम्स की पड़ताल में चौंकाने वाले खुलासे, सुविधाओं के अभाव में राम भरोसे बच्चे

रिपोर्ट से पता चला है कि 45 प्रतिशत बालगृहों के पास ही डॉक्टर्स उपलब्ध हैं। 23 परसेंट चाइल्ड होम्स के बच्चों को बाहर से खाना पड़ता है। 30 प्रतिशत बालगृहों में चाइल्ड ट्रेनिंग नहीं हो पा रही है। 16 परसेंट चाइल्ड होम्स में फस्र्ट एड ट्रेनिंग नहीं हो रही।

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नई दिल्ली:  राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) की सोशल ऑडिट रिपोर्ट (Social Audit Report) ने देश भर के चाइल्ड होम्स (Child Homes) में सुविधाओं की पड़ताल की तो चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई।

बेड, बॉथरूम, टॉयलेट आदि सुविधाओं की कमी सामने आई है। देश में कुल 7163 चाइल्ड होम हैं, जिसमें से 6299 होम्स का प्रबंधन एनजीओ के हाथ में है।

प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाले राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) की सोशल ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक जेजे एक्ट के हिसाब से 90 प्रतिशत चाइल्ड केयर होम्स में मैनेजमेंट कमेटी तो बन गई है, लेकिन बच्चों की देखभाल को लेकर होने वाली प्रत्येक महीने वाली मीटिंग सिर्फ 15 प्रतिशत चाइल्ड होम में ही होती हैं।

बाकी 85 प्रतिशत बाल गृहों में रहने वाले बच्चों के हालात की हर महीने समीक्षा ही नहीं होती।

रिपोर्ट से पता चला है कि 45 प्रतिशत बालगृहों के पास ही डॉक्टर्स उपलब्ध हैं। 23 परसेंट चाइल्ड होम्स के बच्चों को बाहर से खाना पड़ता है। 30 प्रतिशत बालगृहों में चाइल्ड ट्रेनिंग नहीं हो पा रही है। 16 परसेंट चाइल्ड होम्स में फस्र्ट एड ट्रेनिंग नहीं हो रही।

मूलभूत सुविधाएं भी नहीं

हैरान करने वाली बात ये है कि देश के 12 प्रतिशत बालगृहों में बाथरूम तक नहीं है, जबकि 18 परसेंट में टायलेट तक नहीं है। जेजे एक्ट के लागू होने के चार सालों के बाद अभी तक प्रतिशत चाइल्ड होम्स में टॉयलेट के एंट्री और एक्जिट प्वाइंट पर कैमरा नहीं लगा है।

10 प्रतिशत बालगृहों में बेसिक मेडिकल उपरकरण भी नहीं है। जबकि कानूनन चाइल्ड होम्स चलाने के लिए ये अनिवार्य है। 14 परसेंट चाइल्ड होम्स में तो बाथरूम भी नियमों के हिसाब से नहीं है।

चार फीसदी में तो पीने का साफ पानी तक भी नहीं है। लगभग 15 प्रतिशत बालगृहों में तो बच्चों के लिए अकेले बेड भी नहीं है।


 

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