बर्थडे पर पहली बार परिवार के साथ नहीं हैं ऋषि कपूर

2 साल तक कैंसर से जंग लड़ने के बाद इसी साल 30 अप्रैल को हुआ ऋषि का निधन

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कपूर खानदान सुनते ही हमारे मन में अपने आप कुछ नाम आने लगते हैं, बॉलीवुड का सबसे पुराना और सबसे समृद्ध कपूर खानदान (Kapoor Family)। जिसकी शुरुआत पृथ्वीराज कपूर (prithviraj kapoor) से होती है और राज कपूर, शम्मी कपूर, शशि कपूर, ऋषि कपूर (Raj Kapoor, Shammi Kapoor, shashi kapoor, Rishi kapoor) से होते हुए रणबीर कपूर (Ranbir Kapoor) तक आती है। कपूर खानदान अपने आप में एक एक्टिंग का एक स्कूल है जहां हमें हर तरह के फ्लेवर देखने को मिलेंगे। राज कपूर की मेरा नाम जोकर (Mera naam Joker) जैसी आर्ट फिल्में तो वही ऋषि कपूर की चॉकलेटी बॉय वाली रोमांस से भरी फिल्में।

4 सितंबर 1952 को अभिनेता राजकपूर के घर जन्मे ऋषि कपूर ने बॉलीवुड में अपना पदार्पण अपने पिता द्वारा बनाई गई फिल्म ‘मेरा नाम जोकर’ से बाल कलाकार के रूप में की। जितनी लगन और जितनी मेहनत से राज कपूर ने इस फिल्म में अपनी ऊर्जा झोंकी थी यह फिल्म उतना कमाल नहीं दिखा पाई, लेकिन ऋषि कपूर को इसने स्थापित कर दिया। 1970 में मेरा नाम जोकर के लिए ऋषि कपूर को पुरस्कार मिले थे और उनका काम पहचाना गया।

पहली फ़िल्म

कहते हैं कि ‘मेरा नाम जोकर’ के बाद राजकपूर कर्जे में डूब गए थे, इससे उबरने के लिए उन्होंने मसाला फिल्मों की ओर रुख किया। उस समय उन्होंने सबसे पहली बार एक टीनएजर लव स्टोरी को पर्दे पर जगह दी। इस फिल्म के लिए हीरो तो अपने घर में ही अपने बेटे के रूप में मिल गया लेकिन हीरोइन के लिए अच्छी खासी टेस्टिंग करनी पड़ी। उसके बाद 1973 में बनकर आई ‘बॉबी’ (Bobby) जो रिकॉर्ड तोड़ हिट रही। उसका गाना ‘हम तुम एक कमरे में बंद हो’ आज भी लोगों की जुबान पर रहता है। इस फिल्म के बाद ऋषि कपूर रातों-रात स्टार बन गए।

कुछ खास फिल्में

बॉबी के बाद साल 2000 तक उन्होंने 90 से अधिक रोमांटिक/कॉमेडी फिल्मों में लीड रोल किया। इनमें “प्रेम रोग, बोल राधा बोल, दीवाना, कर्ज, नसीब, कुली, चांदनी, नगीना, खुदगर्जी, हिना, दामिनी” जैसी फिल्में शामिल थी। कुली, अमर अकबर एंथनी और कभी-कभी जैसी फिल्मों में ऋषि कपूर ने अमिताभ बच्चन, विनोद खन्ना, शशि कपूर जैसे बड़े-बड़े अभिनेताओं के साथ भी स्क्रीन साझा की। 2000 के बाद ऋषि कपूर ज्यादातर पिता और अन्य कैरेक्टर रोल में नजर आने लगे। अपने आखिरी कुछ वर्षों में मुल्क, कपूर एंड संस (Mulk, Kapoor &Sons) जैसी फिल्मों से उन्होंने अपनी छाप छोड़ी।

विवादों में भी रहे

ऋषि कपूर सोशल मीडिया पर अपनी टिप्पणियों के चलते अक्सर विवादों में भी रहते थे और चर्चा में बने रहते थे। कुछ साल पहले ही उनकी जीवनी ‘खुल्लम खुल्ला’ (Khullam Khulla) नाम से भी उन्होंने लिखी। 2008 में ऋषि कपूर को फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट (Lifetime Achievement) अवार्ड मिला था। इसी वर्ष 30 अप्रैल 2020 को 2 साल तक कैंसर से जूझने के बाद बॉलीवुड के चिंटू “ऋषि कपूर” का निधन हो गया।

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