Petrol-Diesel Price Hike: पेट्रोल-डीजल के दामों में क्यों लगातार हो रहा है इजाफा, जानिए कैसे तय होती हैं कीमतें, कितना लगता है टैक्स?

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Petrol-Diesel Price Hike: देश भर में लगातार पेट्रोल-डीजल की कीमतों में इजाफा (Petrol-Diesel Price Hike) हो रहा है। आज लगातार देश में चौथे दिन तेल की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज गई है। जानकारी के मुताबिक आज राजधानी दिल्ली में 35 पैसे की बढ़ोतरी के बाद पेट्रोल 107.24 रुपये और डीजल 95.97 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। तो वही दूसरी तरफ मुंबई में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 113.12 रुपये और डीजल की 104 रुपये है। देश के सात शहर ऐसे हैं, जहां पेट्रोल 110 रुपये प्रति लीटर से महंगा है।

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Petrol-Diesel Price Hike:

Petrol-Diesel Price Hike: सितम्बर के बाद से लगातार बढ़ रही है कीमतें

बीते सितम्बर से लगातार पेट्रोल-डीजल के कीमतों में इजाफा हो रहा है। सितंबर के बाद से 19 बार पेट्रोल और 22 बार डीजल के दाम बढ़े हैं। इस कारण 24 सितंबर के बाद पेट्रोल 5.7 रुपये प्रति लीटर और डीजल 7 रुपये प्रति लीटर महंगा हो गया है। सरकार तेल आयात करने वाले देशों से बात कर रही है, लेकिन लोगों को जल्द राहत मिलने की उम्मीद नहीं है।

Petrol-Diesel Price Hike: कैसे तय होती है कीमतें

पेट्रोल- डीजल की कीमतें दो मुख्य चीजों पर निर्धारित होती है एक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल यानी कच्चे तेल की कीमत और दूसरा सरकारी टैक्स। कच्चे तेल की कीमत पर सरकार का कोई भी नियंत्रण नहीं होता है लेकिन हाँ उसमें लगने वाला टैक्स सरकार घटा बढ़ा सकती हैं। जिसके बाद जाकर पेट्रोल-डीजल की कीमते तय होती है।

Petrol-Diesel Price Hike: कितना प्रतिशत लगता है टैक्स

जिस रेट में पेट्रोल-डीजल हमे मिलता है उसमें करीब पचास प्रतिशत से ज्यादा टैक्स होता है। उदहारण के तौर पर 1 लिटर पेट्रोल पर करीब 35 प्रतिशत एक्साइज ड्यूटी होती है जो केंद्र सरकार लगाती है इसके बाद इसमें 15 प्रतिशत वेट लगता है जिसे सेल टैक्स के नाम से भी जाना जाता है। इसके साथ 2 प्रतिशत कस्टम ड्यूटी भी होती है और डीलर कमिशन भी जुड़ता है। इन टैक्सों को राज्यों के अनुसार घटाया या बढ़ाया जा सकता है

Petrol-Diesel Price Hike: जीएसटी के दायरे मे आने से क्या पड़ेगा प्रभाव?

अगर पेट्रोल -डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया जाता है तो इसके दामों पर प्रभाव पढ़ सकता है। हालांकि इसमें केंद्र और राज्य सरकार का घाटा  है। उदहारण के तौर पर समझे जैसे 77.83 का दाम टैक्स (एक्साइज ड्यूटी + वेट) हटने पर 41.8 रुपये प्रति लीटर रह जायगा। और अगर इसमें 28 प्रतिशत की दर से जीएसटी जोड़ लिया जाए तो भी 53.50 रुपये बैठेगा। अगर एक लिटर पेट्रोल 77 रुपये के बजाय 53 रुपये में बिकने लगे तो ये कितनी बड़ी राहत होगी, उसका अंदाज़ा लगाना आसान है।

Petrol-Diesel Price Hike: आखिर क्यों सरकार नहीं ला रही GST के दायरे में

अक्सर चुनाव के वक़्त पेट्रोल- डीजल को जीएसटी के दायरे मे लाने की बात की जाती है लेकिन ऐसा होता नहीं क्योंकि सरकार का मानना है कि कोरोना की वज़ह से अर्थव्यवस्था लड़खड़ाई हुई है उद्योग पटरी पर लौट रहे हैं ,व्यापार बढ़ रहा है, लेकिन अर्थव्यवस्था की सेहत सुधरने में समय लगेगा इसीलिए सरकार पेट्रोल- डीजल को जीएसटी में नहीं ला रही।

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