अंधभक्ति, राजनीति और वर्ण-व्यवस्था का कॉकटेल है ‘आश्रम’

प्रकाश झा के निर्देशन में बनी है यह सीरीज,mx player पर है मौजूद।

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सिरीज़ : आश्रम

प्लेटफॉर्म :एम एक्स प्लेयर

निर्देशक :प्रकाश झा

कलाकार :बॉबी देओल, दर्शन कुमार, अदिती सुधीर पोहनकर, अनुप्रिया गोयनका, विक्रम कोचर, राजीव सिद्धार्थ और सचिन श्रॉफ़
रेटिंग : 2.5/5

प्रकाश झा (Prakash Jha) द्वारा निर्देशित-निर्मित एम एक्स प्लेयर की सिरीज़ ‘आश्रम’ (Ashram) अंधभक्ति, राजनीति, कूटनीति, व्यापार, वर्ण-व्यवस्था और गुनाहों का कॉकटेल है जिसका नशा इस सिरीज़ मे चढ़ नही पाता।

क्या है कहानी

कहानी है काशीपुर इलाके के एक आश्रम और उसके सर्वेसर्वा मोंटी सिंह उर्फ़ बाबा काशीपुर वाले की।
कहानी के दो सिरे हैं जो पूरी सिरीज़ मे साथ-साथ चलते हैं।

“ऊँची जात के हो ना इसीलिए आप आज़ादी की बात कर सकते हो”

कहानी के पहले सिरे की शुरुआत प्रकाश झा अपने चिर-परिचित अंदाज़ मे करते हैं। काशीपुर के बड़े मोहल्ले के लोगों को एक दलित का घोड़ी पर बारात ले जाना रास नही आता और इसी बात के लिये ‘बड़े लोग’ उनकी पिटाई कर देते हैं।

पम्मी (अदिती सुधीर पोहनकर) अपने भाई की पिटाई से क्षुब्ध हो पत्रकार अक्की (राजीव सिद्धार्थ) के साथ FIR कर देती है। यहीं से काशीपुर वाले बाबा (बॉबी देओल) की सिरीज़ मे एन्ट्री होती है। और शुरु होता है बाबा की राजनीति-कूटनीति का खेल जो एक तरफ अपने डेरे को मजबूत बनाने तो दूसरी तरफ राजनीति की बिसात पर अपने मोहरे भी चमकाने मे जुटा है।

“जहाँ नोटों से होती हो कायदे-कानूनों की ऐसी की तैसी, उसी को कहते हैं इंडिया में डेमोक्रेसी ”

सूबे के मुख्यमंत्री की सह पर वन विभाग की जमीन को एक बड़े बिल्डर को आवंटित कर दिया जाता है। ज़मीन की खुदाई के दौरान निकलती है एक लाश जो कहानी के दूसरे सिरे की नींव रखती है। सब-इंस्पेक्टर उजागर सिंह (दर्शन कुमार) को मामले की सतही तहकीकात करने की जिमेदारी मिलती है। हर बात को 360 डिग्री से देखने वाले गैर-जिम्मेदार उजागर को शून्य डिग्री दिखाती है डॉक्टर नताशा (अनुप्रिया गोयनका) और उजागर अब सिस्टम से भिड़ने को तैय्यार होता है।

बाबा और आश्रम के कर्मकांडों और लाश की तफ्तीश की सुरागों से कहानी आगे ‘खिंचती’ है।

कहानी मे मुख्यमंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री भी हैं जो अपनी कुर्सी बचाने और पाने के लिये हर हथकण्डे अपना रहे हैं और इसमे बाबा भी अपने हाथ बखूबी सेंक रहे हैं।

सिरीज़ के किरदार

एक धूर्त, कूटनीतिज्ञ और पाखंडी बाबा के लिये गढ़े गये किरदार मे बॉबी देओल वह पुट नही ला सकें जिसकी जरुरत थी। बाबा के दाहिने हाथ भोपा स्वामी के किरदार मे चंदल रॉय सान्याल जमे हैं जिनके हाथों सिरीज़ के सभी गुनाह और काण्ड हुए हैं।

एकदलित महिला पहलवान पम्मी के किरदार के साथ अदिती ने न्याय किया है और कहानी का पहला और महत्वपूर्ण सिरा पम्मी से जुड़ा है।
दर्शन कुमार और उनके साथ विक्रम कोचर(हवलदार साधू) ने प्रभावित किया है।
सिरीज़ के दूसरे हिस्से मे कुछ देर के लिये आये अध्ययन सुमन एक रफ-टफ रॉकस्टार के तौर पर बखूबी जमे हैं।

और अन्त में

बाबा के आश्रम मे अस्पताल, विद्यालय, हॉस्टल और उद्योग सब कुछ हैं। यहाँ ड्रग्स का कारोबार भी है और हत्या-ब्लैकमेल का खेल भी यानी आश्रम की चारदीवारी के भीतर काशीपुर वाले बाबा का साम्राज्य चल रहा है। काशीपुर वाले बाबा मे राम रहीम और आसाराम का भी पुट है जिससे निर्माताओं ने इनकार किया है। इसीलिये कहानी मे कोई नयापन नही दिखता क्योंकि सिरीज़ की सभी घटनाएँ पहले ही समाचारों मे आ चुकी हैं। सिरीज़ कहीं से भी बाँधती नही दिखती फिर भी इसे प्रकाश झा की वजह से देखा जा सकता है।

सीरीज धीमे चलती है और इसकी लम्बाई भी ज्यादा है इसे कम करने की पर्याप्त सम्भावनायें थी।विभिन्न पहलुओं के अनछुए रह जाने के कारण सिरीज़ के पहला भाग को एक तरह से भूमिका के तौर पर भी लिया जा सकता है। सिरीज़ के अन्त मे अगले भाग का प्रोमो भी है और प्रोमो के आधार पर अगले भाग की पहले भाग से ज्यादा रोमांचक होने की उम्मीद की जा सकती है।

-Anshu Tiwari

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