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शिक्षा नीति को मिली मंजूरी, देखें क्या है खास

पूर्व इसरो अध्यक्ष डॉ. के. कस्तूरीरंगन ने तैयार की है यह नीति

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प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्र सरकार ने बुधवार 29 जुलाई 2020 को नई शिक्षा नीति को मंजूरी दे दी गई है।  नीति को इसरो के पूर्व अध्यक्ष डॉक्टर के कस्तूरीरंगन ने तैयार किया है। इस नीति से निजी स्कूलों पर लगाम लगाई जा सकती है। इससे की निजी स्कूलों द्वारा कड़ी फीस वसूलने पर रोक लगेगी। वही प्राथमिक विद्यालयों में मिड डे मील में अब नाश्ते की भी व्यवस्था होगी।

मेडिकल और विधि को छोड़ पूरी उच्च शिक्षा का एक नियामक होगा। इसके अलावा मानव संसाधन विकास मंत्रालय अब शिक्षा मंत्रालय के नाम से जाना जाएगा। साथ ही अब शिक्षा पर जीडीपी का 6 फ़ीसदी खर्च किया जाएगा। आपको बता दें कि पहले शिक्षा पर 4.43 फ़ीसदी खर्च किया जाता था।हर पांच साल में समीक्षा भी होगी।इससे शिक्षा की गुणवत्ता पर भी नज़र रखी जाएगी।
इसके अलावा शिक्षा में तमाम सारे बड़े बदलाव भी सामने आए हैं।

अब पांचवी कक्षा तक की पढ़ाई मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा में होगी। इसके अलावा डिजिटल और ऑनलाइन शिक्षा पर भी जोर दिया जाएगा। वही नर्सरी से स्नातक तक के पाठ्यक्रम और शैक्षणिक ढांचे को चार भागों में बांटा गया है। जिसे 5+3+3+4 का नाम दिया गया है। 34 साल के बाद इतना भारी परिवर्तन देखने को मिला है।

इस नीति निर्माण में पूरे देश की विभिन्न संस्थाओं द्वारा दो लाख से अधिक सुझाव लिए गए हैं। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने यह जानकारी साझा की। नई शिक्षा नीति का मुख्य लक्ष्य 2035 तक उच्च शिक्षा में पंजीकरण की बढ़ोतरी का है।

अब तक 26.3 फ़ीसदी का है। इसके अलावा 3.5 करोड़ नई सीटों को भी जोड़ा जाएगा। वहीं स्कूली शिक्षा में भी बड़े बदलाव की तैयारी है। संभव है साल में एक बार होने वाली बोर्ड परीक्षाओं में परिवर्तन हो सकते हैं। इस प्रक्रिया के लिए अलग नीति बनाई जाएगी।

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