मां नंदा को उनके मायके से ससुराल भेजने की यात्रा है नंदा राजजात

कुमाऊं-गढ़वाल की साझी विरासत है मां नंदा देवी राजजात

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उत्तराखंड की एक अनूठी सांस्कृतिक विरासत जिसे नंदा देवी राजजात के नाम से जाना जाता है वो आज से शुरू हो रही है। इस यात्रा में काफी दुर्गम स्थलों से होते हुए बहुत ही लंबी यात्रा करके मां नंदा देवी को उनके ससुराल पहुंचाया जाता है। आज मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने नंदा देवी राजजात की घोषणा की है, और बताया कि वह यात्रा शुरू हो चुकी है पर इस वर्ष कोरोना महामारी की वजह से उस में बहुत सीमित लोग प्रतिभाग कर पाएंगे।

क्या कहा मुख्यमंत्री ने

गढ़-कुमाऊं की ईष्टदेवी मां नंदा देवी की वार्षिक लोकजात्रा का आज शुभारंभ हो गया है। मां नंदा देवी की डोली कुरुड़ से वेदिनी के लिए आज प्रस्थान करेगी। कोरोना के चलते सीमित लोग ही यात्रा में शामिल हो पाएंगे, कोविड-19 के चलते सभी श्रद्धालुओं से निवेदन है कि इस महामारी से बचाव के सभी नियमों का अवश्य अनुपालन करें। माँ नंदा देवी कोरोना के इस संकट काल से सभी को बाहर निकालें और प्रदेश में सुख समृद्धि और सभी के कल्याण करें, ऐसी कामना करता हूं।

||जय माँ नन्दा देवी राजराजेश्वरी||

क्या है नंदा देवी राजजात

मान्यता है कि मां नंदा देवी जो कि भगवान शिव की पत्नी हैं वह एक बार अपने मायके आई हुई थी लेकिन किसी कारण से 12 वर्ष तक अपने ससुराल नहीं जा पाई जिसके बाद उन्हें पूरे उत्सव की तरह उन्हें उनके ससुराल पहुंचाया गया।

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