जानिए ऐतिहासिक दृष्टि से आज का दिन क्यों है खास

13 सितंबर केवल तारीख मात्र ही नहीं बल्कि तमाम स्मृतियों का स्मरणचिन्ह है।

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आज से 90 साल पहले यानी 1929 में महान क्रांतिकारी यतींद्रनाथ (Yatindra Nath) की 63 दिन के भूख हड़ताल के बाद मृत्यु हो गई थी । यतिंद्रनाथ ने यह उपवास इसलिए रखा था ताकि भगतसिंह (Bhagat Singh) और उनके साथ के राजनैतिक कैदियों के साथ होने वाले अन्याय को रोका जा सके । वे चाहते थे कि भारतीय कैदियों को भी विदेशी कैदियों की तरह ही सुविधाएं मिले। यतींद्र नाथ को 14 जून 1929 को गिरफ्तार किया गया तथा लाहौर जेल ले जाया गया जहां महज 24 साल की उम्र में ही उन्होंने अपने प्राणों की आहुति दे दी ।

आज के दिन ही 1947 में सरदार पटेल (Sardar Patel) ने तत्कालीन रक्षा मंत्री बलदेव सिंह (Baldev Singh) को चिट्ठी लिखी थी कि कश्मीर चाहे तो भारत में शामिल हो सकता है ।पटेल इस बात से नाराज थे कि पाकिस्तान ने जूनागढ़ के विलय का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है ।उन्होंने तर्क दिया कि यदि हिंदू बहुल इलाके जूनागढ़ (Junagarh )को पाकिस्तान अपना हिस्सा बना सकता है तो मुस्लिम बहुल इलाके कश्मीर को भारत अपना हिस्सा क्यों नहीं बना सकता। उस दिन के बाद से कश्मीर पटेल की प्राथमिकता बन गई ।

 

आज के दिन ही 1947 में प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू (Jawaharlal Nehru )ने 40 लाख हिंदू और मुसलमानों को पारस्परिक स्थानांतरण का सुझाव दिया था ।1948 में पटेल के आदेश पर हैदराबाद में 13 से 18 सितंबर तक ऑपरेशन पोलो (Operation Polo)चला था। इसके बाद वहां का निजाम भारत में शामिल होने के लिए राजी हो गया ।

 

13 सितंबर को ही विश्व भाईचारा एवं क्षमादान दिवस मनाया जाता है।

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