‘पाकीज़ा’ की दास्तान-ए-इश्क

रील से रियल तक ट्रेजडी क्वीन रहीं मीना कुमारी

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1 अगस्त 1933 को जन्म के साथ ही उनके पिता ने उन्हें अनाथाश्रम छोड़ दिया, पर कुछ ही देर में पिता की दिल पसीजा तो वापस लौटे और देखा कि उनकी मासूम सी बच्ची के नाजुक से शरीर से चींटीयां चिपकी हुई हैं। उन्होंने फटाफट अपनी बच्ची को साफ किया और घर लेकर आए, नाम रखा महज़बीं बानो। आगे चलकर यही महज़बीं बानो हर दिल अजीज़ ट्रेजडी क्वीन और बेहतरीन शायरा मीना कुमारी के नाम से मशहूर हुई।

पाकीज़ा का अधूरा इश्क़

मीना कुमारी की हर कामयाब फिल्म के साथ उनके फैन्स की लिस्ट बढ़ती गई। अपने नाम की तरह ही वे किसी चमकते चांद की तरह थीं। लेकिन जिस तरह चांद में दाग है उसी तरह मीना कुमारी की ज़िंदगी में कभी भी इश्क पूरा न हो सका, और यही अधूरा इश्क उनकी ज़िंदगी को एक अजीब से खालीपन से भर गया, जिसमें उन्होंने शराब भर दी। जो पहले लीवर कैंसर और फिर मात्र 38 साल की उम्र में उनकी मौत का कारण बना। तो आइए आज आपको सुनाते हैं बॉलीवुड की पाकीज़ा के अधूरे इश्क की चुनिंदा दास्तान।

मीना कुमारी और कमाल अमरोही

निर्देशक कमाल अमरोही और मीना कुमारी   का इश्क परवान चढ़ा और शादी की मंजिल तक भी पहुंचा। मगर दो शर्तों के साथ। पहली ये कि मीना कुमारी के मेकअप रुम में मेकअप आर्टिस्ट के अलावा कोई पुरुष दाखिल नहीं होगा। और दूसरी ये कि वो शाम 6.30 बजे तक अपने घर लौटेंगी। बचपन से प्यार से महरूम मीना कुमारी अमरोही के इश्क में इस कदर गिरफ्तार थीं कि उन्होंने उनकी हर बात, हर शर्त मानी। लेकिन इसके बाद भी उनका इश्क कमाल अमरोही के ईगो और शक की भेंट चढ़ गया। अमरोही ने मीना की जासूसी तक कराई। मीना की सूजी आंखें और उदास चेहरा उनकी प्यारी सी मुसकान के पीछे छिपे दर्द को बखूबी बयां करता था। ये दर्द उनकी शायरी में भी नज़र आया। और एक दिन मीना कुमारी और कमाल अमरोही अलग हो गए।

मीना कुमारी और गुलज़ार

कमाल अमरोही के शक और ज्यादती से परेशान मीना कुमारी अब अपने हिस्से की ज़मीन तलाशने लगी थीं। सुकून भरे पलों की तलाश में वे गुलज़ार के करीब आ गईं। दोनों की प्रेम कहानी काफी चर्चा में रही। मीना कुमारी ने अपने आखिरी वक्त में एक वसीयत लिखी थी, जिसमें उन्होंने अपनी शायरी की डायरी गुलज़ार के नाम कर दी। बाद में गुलज़ार ने उन्हें किताब की शक्ल देकर उनके चाहने वालों की नज़र किया।

मीना कुमारी और धर्मेंद्र

जब धर्मेद्र ने बड़े परदे पर कदम रखा तब मीना कुमारी बॉलीवुड का एक बड़ा नाम बन चुकी थीं। वो धर्मेद्र को एक्टिंग की बारीकीयां सिखाती थीं। लोग मीना कुमारी को धर्मेद्र का मेन्टॉर भी कहते थे। दोनों एक्टिंग करते करते ही एक दूसरे के करीब आ गए। लेकिन दोनों ही शादीशुदा थे जिसकी वजह से ये प्यार अपने मुकाम तक नहीं पहुंचा। कहते हैं कि एक बार धर्मेंद्र मीना कुमारी के घर से डायरी चुराते हुए भी पकड़े गए थे। मीना कुमारी के अंतिम वक्त में जो लोग उनके साथ रहे उनमें धर्मेंद्र भी थे।

कहते हैं भरत भूषण और राजकुमार भी मीना कुमारी से अपने इश्क का इज़हार कर चुके थे। लेकिन फिर भी मीना कुमारी की ज़िंदगी में इश्क हमेशा अधूरा ही रहा। जिसका दर्द उनकी शायरी में भी दिखा। तो पेश है उनकी ये ख़ास शायरी, उनकी डायरी से।

ये रात ये तन्हाई

ये दिल के धड़कने की आवाज़

ये सन्नाटा

ये डूबते तारों की

खामोश ग़ज़ल-कहानी

ये वक़्त की पलकों पर

सोती हुई वीरानी

जज़्बात-ए-मुहब्बत की

ये आखिरी अंगडाई 

बजती हुई हर जानिब

ये मौत की शहनाई

सब तुम को बुलाते हैं

पल भर को तुम आ जाओ

बंद होती मेरी आँखों में

मुहब्बत का

इक ख़्वाब सजा जाओ।

लाखों करोड़ा दिलों का ख्वाब रही मीना कुमारी के ज़िंदगी से इश्क का ख्वाब हमेशा अधूरा ही रहा और इस तरह बॉलीवुड की पाकीज़ा की इश्क़ की दास्तान अधूरी रह गई।

शिखा सिंह
पत्रकार एवं लेखिका
 

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