Lockdown:लॉकडाउन में मजदूर, उद्यमी और समाज …

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Lockdown:लॉकडाउन में मजदूर, उद्यमी और समाज …

कोरोनावायरस या कोविड-19 एक महामारी है। जिसने संपूर्ण मानव सभ्यता को एक समान रूप से बुरी तरह प्रभावित किया है। दूसरे शब्दों में कहें तो विश्व के लगभग 7 अरब का मानव समुदाय एक परिवार के रूप में इससे प्रभावित है। यह महामारी हमारी सभी प्रकार की शक्तियों जैसे आर्थिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक, वैज्ञानिक, तकनीकी, भौतिक और आध्यात्मिक की परीक्षा समूह रूप में ले रही हैं। चीन,अमेरिका, रूस, भारत, बांग्लादेश और पाकिस्तान सहित 180 से अधिक देशों के 3,449,986 लोग इस महामारी से पीड़ित हैं।

दुनिया के 180 देश कोरोना की चपेट में

इस महामारी से अपने को बचने के लिए हम को एकजुट होकर काम करने की आवश्यकता आन पड़ी है। अलग-अलग देश अलग अलग विशेषज्ञता रखते हैं, जिसे एक दूसरे के लिए बिना किसी शर्त के उपलब्ध कराना समय की सबसे बड़ी मांग है। जब तक इस महामारी पर हम निर्णायक विजय नहीं पा जाते और हमारे चिकित्सक और वैज्ञानिक इसका तोड़ नहीं तलाश लेते तब तक हमें अपने अन्य मोर्चों को कमजोर नहीं होने देना चाहिए। देश लाक डाउन में है, सभी गतिविधियां ठप हैं, ऐसे में तमाम आर्थिक, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक समस्याएं उत्पन्न होंगी। इनका हमें एक समूह के रूप में ही सामना करना होगा।

लॉकडाउन की सबसे ज्यादा मार मजदूरों पर

मानव समाज का वह हिस्सा, जिसका जीवन सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाला है, उसकी संख्या बहुत बड़ी है। इसमें संगठित, असंगठित क्षेत्रों में नियोजित मजदूर और कर्मचारियों की संख्या सर्वाधिक है और उनके जीवन की गाड़ी का पहिया तब तक ही चलता है जब तक उनकी जेब में पैसा हो अथवा महीने के अंत में पैसे मिलने की संभावना हो।

उद्यमियों और श्रमिकों को मिल कर इस आपात स्थिति से निपटना होगा

कुछ ऐसे उद्यमी भी हैं जिन्होंने बड़ा साहस करके, जोखिम उठाकर अपने उद्यमों का संचालन किया है ।समस्या उनके भी सामने है और गंभीर रूप में है। हम सब के ऊपर संरक्षक की भूमिका में सरकार है। ऐसी परिस्थितियों में हमें एक युक्ति अपनानी पड़ेगी जिससे हमारे परिवार का प्रत्येक सदस्य इस भयावह वर्तमान का न केवल सामना कर सके वरन सुखद परिवेश का निर्माण भी कर सकें जिससे इस महामारी के असर को लगभग बेअसर किया जा सके।

भारत में कोविड-19 से 40,263 लोग संक्रमित 

वर्तमान समय की पहली चुनौती है हम सभी का जिंदा बचे रहना। इसके लिए हमें सरकार के निर्णय और सरकारी दिशानिर्देशों का पालन करते रहना है।हमें सरकार पर पूर्ण विश्वास करते हुए अफवाहों और गलत सूचनाओं के प्रसार का हिस्सा बनने से बचना होगा।

कोरोना की सबसे ज्यादा मार श्रमिकों पर

दूसरी और सबसे गंभीर समस्या है कि जिंदा रहने के लिए जिन मूलभूत वस्तुओं की आवश्यकता है उसे कैसे पूरा किया जाए? इसके लिए मजदूर, कर्मचारी, समाज और सरकार सभी को अपने दायित्व के निर्वहन में सर्वोत्कृष्ट चरित्र का प्रदर्शन करना होगा।

 

इसके लिए कुछ नियम मानने होंगे जैसे :-

कोई भी नियोजक अपने द्वारा नियोजित व्यक्ति की तनख्वाह में कोई कटौती न करें क्योंकि एक बात हेनरी फोर्ड ने कही थी उसे याद रखना होगा। उन्होंने कहा था ‘मेरी सभी पूजी ले लो,मुझे मेरे कर्मचारी दे दो, मैं फिर एक बड़ी कंपनी खड़ा कर लूंगा।’

कर्मचारी अपने नियोजक के प्रति वफादारी का प्रदर्शन करने का संकल्प लें। वे अपने नियोजक के लिए महामारी के बाद अधिक काम करने का संकल्प लें वह भी कुछ कम वेतन पर भी।

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सरकार के पास वर्तमान में खर्चों का बोझ बहुत बड़ा है फिर भी वह संरक्षक के नाते यह विश्वास दिला सकती है कि पैसा अभी कर्मचारियों को भले न दे पाए परंतु उनका संरक्षण अवश्य करेगी। हम सभी एक ट्रस्टी का भाव लेकर कार्य करें। क्योंकि इस धरती पर हमारी उपलब्धियां आज साझी संपत्ति होनी चाहिए जिसका उपयोग सबको समान रूप से करने का अधिकार हो।

 

  •  हम इस आर्थिक समस्या का भी समाधान कर लेंगे। यदि निम्नलिखित मंत्र का अनुसरण करेंगे

 

” भूख से थोड़ा कम भोजन,

 जरूरत से थोड़ी कम खरीदारी,

थकने से थोड़ा ज्यादा मेहनत।”

 

 एडवोकेट अरविंद कुमार पांडेय की कलम से
                    एडवोकेट इलाहाबाद हाइकोर्ट / विधिक सलाहकार प्रताप किरण न्यूज                           

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