जम्मू-कश्मीर: स्कूल खुले लेकिन सुरक्षा की जिम्मेदारी ‘माता-पिता’ की

निदेशालय अभिभावकों से जो लिखित अनुमति ले रहा है, उसमें लिखा गया है कि "मैं जिम्मेदारी लेता हूं कि मैं कोविड-19 संक्रमण की किसी भी घटना के लिए स्कूल में किसी को भी दोषी नहीं ठहराऊंगा।"

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श्रीनगर: जम्मू और कश्मीर (Jammu and Kashmir) में सोमवार से क्लास 9वीं से 12 वीं के स्कूल (Class 9-12 School)  फिर से खुल रहे हैं, लेकिन छात्रों की सुरक्षा (Student safety) की पूरी जिम्मेदारी (All Responsibility) अभिभावकों (Parents)  की होगी। स्कूल शिक्षा निदेशालय (Directorate of school education) ने ऐसा तरीका अपनाया है जिसमें बच्चों की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी माता-पिता पर डाल दी गई है।

इसके तहत निदेशालय अभिभावकों से जो लिखित अनुमति (written permission) ले रहा है, उसमें लिखा गया है कि “मैं जिम्मेदारी लेता हूं कि मैं कोविड-19 संक्रमण की किसी भी घटना के लिए स्कूल में किसी को भी दोषी नहीं ठहराऊंगा।” यह स्वीकृति उन सभी अभिभावकों को हस्ताक्षर करके देनी होगी जो क्लास 9वीं से 12 वीं के बच्चों को स्कूल भेज रहे हैं।

इन निर्देशों में यह भी कहा गया है कि माता-पिता फेस मास्क, सैनिटाइजर देने के साथ-साथ यह भी सुनिश्चित करेंगे कि बच्चे बेल्ट, अंगूठी, घड़ी जैसी चीजें न पहनें।

5 अगस्त, 2019 को राज्य में अनुच्छेद 370 निरस्त करने के बाद भी शैक्षणिक संस्थान बंद कर दिए गए थे। इन्हें इस साल मार्च में फिर से खोलने का निर्णय लिया गया था, लेकिन कोविड-19 संक्रमण को रोकने के लिए स्कूल बंद करने पड़े।

केन्द्रशासित प्रदेश में कोविड-19 मामलों की बढ़ती संख्या के बाद भी स्कूलों को फिर से खोलने के निर्णय की खासी आलोचना हो रही है। यहां आम धारणा है कि महामारी को देखते हुए अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजने से हिचक रहे हैं।

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