व्हाइट हाउस मे लिखी गई UAE-बहरीन-इजराइल संबंधों की नई इबारत, पढ़े यह विस्तृत रिपोर्ट

कल दोपहर (भारतीय समयानुसार देर रात 11 बजे) व्हाइट हाउस मे एक समारोह के दौरान इजराइल ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और बहरीन के साथ दशकों पुराने विवाद का अन्त करते हुए शांति और सहयोग के समझौते पर हस्ताक्षर कियें।

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व्हाइट हाउस की बालकनी से बोलते हुए, ट्रम्प ने कहा,

“आज दोपहर हम यहाँ इतिहास बदलने के लिये एकजुट हुए हैं। यह मध्य पूर्व के लिये एक उत्कृष्ट प्रगति है, जहाँ सभी धर्मों और पृष्ठभूमि के लोग शांति और समृद्धि में एक साथ रहते हैं। मध्य पूर्व के ये तीन देश अब एक साथ काम करने जा रहे हैं, ये अब दोस्त हैं।”

इजराइल-बहरीन-संयुक्त अरब अमीरात के नये संबंध

व्हाइट हाउस के लॉन में US राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की मौजूदगी मे लोगों की भीड़ के सामने, इजराइल के प्रधानमंत्री ‘बेंजामिन नेतन्याहू’ ने UAE के विदेश मंत्री ‘शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल-नाहयान’ और बहरीन के विदेश मंत्री ‘अब्दुल्लतीफ अल ज़ायनी’ के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए। इससे मध्य पूर्व एशिया मे इन दोनो देशों के इजराइल के साथ नये संबंधो के बनने से इस क्षेत्र मे शांति की उम्मीदें की जा रही हैं।

फिलिस्तीन के साथ वर्तमान रिश्तों मे उतार-चढ़ाव के कारण UAE और बहरीन तीसरे और चौथे ऐसे देश हो गये हैं जिन्होने इजराइल के साथ शांति सन्धि स्थापित किया है। इसके पहले इस क्षेत्र मे इजरायल के साथ मिस्र (1979) और जॉर्डन (1994) ने ही शान्ति सम्बंध बनाये थे।

समझौते के पहले ‘ओवल ऑफ़िस’ में नेतन्याहू से मुलाकात करते हुए, ट्रम्प ने कहा कि इजराइल के साथ अपने रिश्ते सामान्य बनाने के लिये, हमारे पास पांच या छह देश बहुत जल्दी आने वाले हैं। हालाँकि ट्रम्प ने इस तरह की बातचीत में शामिल किसी भी देश का नाम नहीं लिया।

मध्य पूर्व के तीनों नेताओं ने समझौतों और इस दिशा मे ट्रम्प की भूमिका की सराहना भी की, नेतन्याहू ने इसे अरब के सभी लोगों के लिये उम्मीद देने वाला बताया।

इजरायल, संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन का एक साथ आना इस क्षेत्र मे ईरान के बढ़ते प्रभाव और बैलिस्टिक मिसाइलों के विकास के बारे में उसकी रणनीति के विषय मे इन देशों की साझा चिंता को भी दर्शाता है।

ट्रम्प को राजनीतिक फायदा

3 नवंबर को होने वाले चुनाव मे ट्रम्प का यह कदम उन्हे प्रो-इज़राइल समर्थक ईसाई मतदाताओं के बीच समर्थन हासिल करने में मदद कर सकता है, जो उनके राजनीतिक आधार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

गौरतलब है कि बैक-टू-बैक अन्तर्राष्ट्रीय समझौते ट्रम्प के लिए एक अविश्वसनीय राजनयिक जीत है। इसके पहले उन्होंने उत्तर कोरिया के तानाशाह ‘किम जोंग उन’ के साथ भी सफ़ल वार्ता करके लोगों को हैरत मे दाल दिया था।
हालाँकि ट्रम्प कई मौकों पर प्रचार के भूखे भी नजर आते रहते हैं। भारत-पाकिस्तान द्विपक्षीय संबंधों पर गाहे-बगाहे बिना माँगे मध्यस्थता की पेशकश करके उन्होंने ये साबित भी किया है।

इस समारोह से पहले फॉक्स न्यूज से बात करते हुए, ट्रम्प ने चेतावनी के लहजे मे कहा कि फिलिस्तीन को या तो अंततः इजरायल के साथ शांति कायम करनी होगी या फिर उन्हे ऐसे ही हालातों में छोड़ दिया जाएगा।

सऊदी अरब, ओमान और ईरान पर नजरें

सऊदी अरब, जो सबसे बड़ी खाड़ी शक्ति है, ने फिलहाल यह संकेत दिया है कि वे इजराइल के साथ अभी ऐसे किसी भी समझौते के लिये तैयार नहीं हैं, हालांकि शान्ति समझौतों के लिए उनके चुप रहने को महत्वपूर्ण भी माना जा रहा है।

सऊदी के अतिरिक्त ओमान के नेता ने पिछले हफ्ते ट्रम्प के साथ बात की थी। व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि हमे मंगलवार के समारोह में ओमान के अपने राजदूत को भेजने की भी उम्मीद थी।

ईरान के सन्दर्भ मे ट्रम्प ने भविष्यवाणी की कि भारी अमेरिकी प्रतिबंधों के तहत, ईरान भी वाशिंगटन के साथ एक समझौते पर पहुंचना चाहेगा, जो अपने अंतरराष्ट्रीय परमाणु समझौते को फिर से संगठित करने की कोशिश कर रहा है। हालाँकि ईरान की तरफ से इस पर कोई प्रतिक्रिया नही आई है।

दबाव में नेतन्याहू

यह नेतन्याहू के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत है, लेकिन यह समारोह तब हुआ है जब उन पर अपने देश मे कोरोनोवायरस महामारी से निपटने मे नाकाम होने के आरोप लग रहे हैं। इसके अलावा उन पर रिश्वत-धोखाधड़ी के आरोपों पर भ्रष्टाचार का मुकदमा भी चल रहा है। इन सब के कारण नेतन्याहू के खिलाफ कुछ समय से सड़क पर विरोध प्रदर्शन भी हो रहे हैं।

हालाँकि नेतन्याहू किसी भी गलत काम से इनकार करते हैं और इन सब आरोपों और विरोधों को अपने खिलाफ ओछी राजनीति का नाम देते हैं।

अभी सब कुछ पूरी तरह से सुलझा नही है

अभी भी इन नये संबंधों के बावजूद कुछ मतभेद बने हुए हैं। ट्रम्प ने मंगलवार को यह भी कहा कि उन्हें UAE को उन्नत स्टील्थ F-35 फाइटर जेट्स बेचने में कोई समस्या नहीं होगी। UAE की तरफ से F-35 खरीदने के लिए वर्षों से मांग की जा रही है। इसके विरुद्ध, इजराइल जिसके पास वर्तमान मे F-35, वह UAE को इसकी बिक्री को लेकर लगातार ऑब्जेक्शन करता आया है।

फिलिस्तीन है नये संबंधो से नाराज

जब तक इजरायल-फिलिस्तीनी संघर्ष अनसुलझा है, तब तक इस क्षेत्र मे अशांति व्याप्त होना तय माना जा रहा है। इसकी बानगी भी इसी वक़्त देखने को मिल गई जब इजराइल की सेना ने बताया कि इस संधि समारोह के दौरान फिलिस्तीन की ओर से गाजा से इजरायल में रॉकेट भी दागे गये जिससे इजराइल के 6 नागरिक घायल हुए हैं।

फिलिस्तीनी नेतृत्व इन नये संबंधों से खुश नही है और वह UAE-बहरीन के इन नये रिश्तों को अपने साथ विश्वासघात बताया है इसके बावजूद जबकि UAE और बहरीन के अधिकारियों ने फिलिस्तीन को आश्वस्त भी किया है कि वे फिलिस्तीन का साथ नही छोड़ रहे हैं। वे अभी भी ‘वेस्ट बैंक और गाजा पट्टी’ के साथ फिलिस्तीनी ‘स्टेटहुड’ मे सहयोग करते रहेंगे।

फिलिस्तीन ने, UAE के साथ रिश्तों मे सामान्यीकरण लाने के लिये नेतन्याहू द्वारा वेस्ट बैंक के कब्जे वाले कुछ हिस्सों के छोड़ने की योजना के बावजूद, इजरायल के साथ अरब के संबंध का भी खंडन किया है।

इसके अलावा फिलिस्तीनी नेतृत्व लंबे समय से ट्रम्प पर इजराइल समर्थक होने का आरोप लगाता आ रहा है। इसी वजह से ट्रम्प के मध्य पूर्व शान्ति पहल मे हिस्सा लेने के लिये फिलिस्तीन से आग्रह को उसने इनकार कर दिया था। ये अलग बात है कि व्हाइट हाउस को अभी उम्मीद है कि फिलिस्तीन भविष्य मे शान्ति वार्ता के लिये, इजराइल- बहरीन- UAE के शान्ति समझौतों को इण्सेण्टिव के तौर पर देखेगा।

ANSHU MISHRA

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