महत्वपूर्ण पेगासस की जगह अब हर्मिट कर रहा है निगरानी

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इस्राइल के जासूसी सॉफ्टवेयर पेगासस पर होने वाले विवाद के बाद अब एक नया नाम सामने आया है। एक साइबर सुरक्षा कंपनी द्वारा खुलासा किया गया है कि जासूसी के लिए सरकारें अब हर्मिट नाम के स्पाइवेयर काप्रयोग कर रहीं हैं। इस जासूसी सॉफ्टवेयर के ज़रिये इस बार भी नेता, बड़े सरकारी अधिकारी, पत्रकार, मानवाधिकार कार्यकर्ता, शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े लोग तथा कारोबारी हस्तियों पर नज़र रखी जा रही है।

लुकआउट थ्रेट लैब नाम की कंपनी की ओर से मिली जानकारी के अनुसार कजाखस्तान में पहली बार इसका प्रयोग हुआ है।कजाखस्तान में लोग सरकारी नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उतरे हुए थे और कजाख सरकार ने इस आंदोलन को बलपूर्वक दबा दिया था। खबर के मुताबिक़ कजाख सरकार तभी से लोगों की जासूसी के लिए हर्मिट स्पाइवेयर प्रयोग कर रही है। रिपोर्ट से ये भी खबर मिली है कि इसके अलावा सीरिया और इटली में भी यूजर्स के फोन में यह सॉफ्टवेयर देखा गया।

हर्मिट सॉफ्टवेयर एंड्रॉयड फ़ोन में जासूसी करने वाला मॉड्यूलर स्पाइवेयर है, जो डाउनलोड होने के बाद अपना काम शुरू कर देता है। ये जानकारी लुकआउट कंपनी ने अपनी रिपोर्ट में प्रस्तुत की है। यह बार-बार फोन की जांच करते हुए उसके फंक्शन पता करता है।

यह एक फिशिंग अटैक जैसा होता है। इस सॉफ्टवेयर को मोबाइल में एसएमएस के जरिये इंस्टॉल किया जाता है। यह हर्मिट डाउनलोड होने के तुरंत बाद काम शुरू कर देता है।

यह ऑडियो रिकॉर्ड कर सकता है, कॉल कर सकता है और उसे रिडायरेक्ट कर सकता है। इसके अलावा यह कॉल लॉग, डिवाइस की लोकेशन और एसएमएस का डाटा चुरा सकता है।
इसके आईओएस वर्जन का भी पता चला है। यानी आईफोन में भी यह पहुंच सकता है लेकिन उसके सैंपल नहीं मिले हैं।

अपने ब्लॉग में शोधकर्ता ने बताया है कि हर्मिट स्पाइवेयर इटली स्पाइवेयर वेंडर आरसीएस लैब और टेलीकम्युनिकेशन सॉल्यूशन कंपनी ताइकेलैब एसआरएल ने तैयार किया है। इटली सरकार ने 2019 में इसका इस्तेमाल भ्रष्टाचाररोधी अभियान के लिए किया था।

ब्लॉग से मिली जानकारी के अनुसार आरसीएस लैब करीब 30 साल से सक्रिय है और यह पेगासस बनाने वाली इस्राइली फर्म एनएसओ ग्रुप और फिनफिशर बनाने वाले गामा ग्रुप के क्षेत्र में ही काम करती है।

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