विपक्ष के हंगामे के बीच सरकार ने पेश किया कराधान विधेयक

लोकसभा में शुक्रवार को विपक्ष के हंगामे के बीच कराधान एवं अन्य विधियां विधेयक 2020 पेश किया गया। इस विधेयक में कुछ अधिनियमों के प्रावधानों में ढील और बदलाव की मांग की गई है।

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नई दिल्ली: लोकसभा में शुक्रवार को विपक्ष के हंगामे के बीच कराधान एवं अन्य विधियां विधेयक 2020 पेश किया गया। इस विधेयक में कुछ अधिनियमों के प्रावधानों में ढील और बदलाव की मांग की गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) ने शुक्रवार को कराधान विधेयक पेश किया। इससे पहले कराधान एवं अन्य विधियां ( (कतिपय उपबंधों का संशोधन एवं छूट) )अध्यादेश 2020 मार्च में लागू किया गया था।

इसके अलावा 1948 में भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा स्थापित पीएम राष्ट्रीय राहत कोष के खिलाफ केंद्रीय राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर की टिप्पणी के बाद सदन को चार बार के लिए स्थगित करना पड़ा।

कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस आदि विपक्षी दलों के सदस्यों ने विधेयक पेश किए जाने का विरोध करते हुए कहा कि यह राज्यों के अधिकार क्षेत्र में दखल का प्रयास है। विपक्षी सदस्यों ने वस्तु एवं सेवा कर (GST) के तहत राज्यों के हिस्से का बकाया पैसा देने की मांग की।

वहीं, वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि यह गलतफहमी है कि हम किसी राज्य का अधिकार छीन रहे हैं। उन्होंने कहा कि मैं स्पष्ट करना चाहती हूं कि हम जिम्मेदारी से नहीं भाग रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यह विधेयक कर के भुगतान, टैक्स फाइलिंग और रिटर्न फाइल करने से जुड़ा है और हम ऐसा कुछ नहीं कर रहे हैं, जिससे जीएसटी परिषद का उल्लंघन हो। वित्त मंत्री ने कहा कि कर के भुगतान, टैक्स फाइलिंग और रिटर्न फाइल करने का विषय केंद्र सरकार के दायरे में आता है।

इससे पहले कांग्रेस सदस्य शशि थरूर, अधीर रंजन चौधरी और मनीष तिवारी और तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय ने विधेयक पेश किए जाने का विरोध किया। चौधरी ने कहा कि जब संशोधन किया जा रहा है तब इसका कारण भी स्पष्ट होना चाहिए। पीएम केयर्स फंड का जिक्र करते हए उन्होंने कहा कि सरकार को बताना चाहिए कि इसका फायदा किसे मिल रहा है।

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