किस वजह से ‘अलोकतांत्रिक माँग’ करने वाले गुलाम नबी आज़ाद को मिला ईनाम, पढ़े यह रिपोर्ट

वर्तमान मे कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और रास मे नेता विपक्ष हैं आज़ाद, 'लेटर बम' प्रकरण मे थे शामिल

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ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी ने आज शाम संगठन मे नये पदाधिकारियों को जगह दी। इसके अतिरिक्त राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों मे भी पार्टी महासचिवों मे भी फेरबदल किया गया।

पार्टी ने रास सांसद गुलाम नबी आज़ाद (Ghulam Nabi Azad), मल्लिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun Khadge), मोतीलाल वोरा (Motilal Vora) अम्बिका सोनी (Ambika Soni) और लुइजिंहो फैलेरियो को पार्टी महासचिव (secretary) पद से हटा दिया है।

इन नेताओं मे से लम्बे समय तक पार्टी के कोषाध्यक्ष रहे मोतीलाल वोरा, पूर्व केंद्रीय मंत्री अम्बिका सोनी और गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री लुइजिंहो फैलेरियो को हटाने मे उम्र संबंधी कारणों का हवाला दिया जबकि खड़गे को हटाने के पीछे उम्र के साथ ही पिछले लोकसभा चुनावों मे हार जैसे कारणों का भी हवाला दिया गया।

क्या आज़ाद को मिला विरोध का ईनाम

भारत की सबसे पुरानी ‘लोकतांत्रिक राजनीतिक पार्टी’ ने अपने सबसे काबिल, बेबाक और अनुभवी सिपहसालारों मे से एक गुलाम नबी आज़ाद को महासचिव पद से हटाकर एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

हमेशा भारतीय संविधान (indian constitution) और लोकतंत्र को खतरे मे बताने वाली कांग्रेस (congress) ने अपने घर मे अलोकतांत्रिक व्यवहार को बर्दाश्त ना करते हुए अपने अनुभवी नेता गुलाम नबी आज़ाद पर कार्रवाई के साथ-साथ विरोधियों को भी जाता दिया कि पार्टी असहिष्णुता नही बर्दाश्त करेगी।

गौरतलब है कि हाल ही मे कांग्रेस की वर्किंग कमेटी की बैठक मे आज़ाद ने पार्टी के युवराज राहुल गांधी (Rahul Gandhi)की किसी बयान पर मुखालफत कर दी थी। इसके अतिरिक्त 7 अगस्त के कथित ‘लेटर बम’ फोड़ने वाले 23 नेताओं मे आज़ाद भी शामिल थे। यह लेटर वर्तमान कांग्रेस चेयरपर्सन सोनिया गाँधी (sonia gandhi) को लिखा गया था जिसमे ‘फुल टाइम लीडरशिप’ की माँग के अतिरिक्त ‘फ़ील्ड मे ऐक्टिव रहने वाले’ ऐसे नेता की माँग की गई ‘जिसका कार्य प्रभावी साबित हो’।

इस लेटर की टाइमिंग को लेकर पार्टी के युवा नेता गाँधी ने इसमे भाजपा का भी ‘हाथ’ बताया था। शायद राहुल यह भी बताना चाह रहे होंगे कि कांग्रेस के ये 23 नेता ऐसे लेटर नही लिख पाते हैं और इनमे उनकी मदद भाजपा के लोगों ने की होगी।

खैर, आज़ाद की यह ‘अलोकतांत्रिक माँग’ शायद ‘सबसे पुरानी भारतीय लोकतांत्रिक पार्टी’ को रास नही आई और पार्टी को मजबूरन आज़ाद को इस दुस्साहसिक कार्य के लिये महासचिव पद से हटाना पड़ गया।

फिलहाल आज़ाद इस वक़्त राज्यसभा सांसद हैं और सदन मे नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभा रहे हैं। पार्टी के इस कदम से ये भी कयास लगाये जा रहे हैं कि शायद राज्यसभा सांसद के तौर पर यह आज़ाद का आखिरी कार्यकाल हो।

सोनिया के भरोसेमंद नेताओं को मिली ‘संचालन समिति’ मे तरजीह

सोनिया के आदेश पर पार्टी मे बदलाव की माँग की समीक्षा करने के लिये 6 लोगो की एक नई समिति बनाई गई है। इसे संचालन समिति का नाम दिया गया है। इन पदाधिकारियों की सूची मे सोनिया के ‘विश्वासपात्र लोकतंत्रप्रिय नेताओं’ को जगह मिली है। इनमे अहमद पटेल, अम्बिका सोनी, पूर्व रक्षामंत्री ए के एंटनी, केसी वेणुगोपाल, मुकुल वासनिक और रणदीप सुरजेवाला को शामिल किया गया है।

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