फिल्ममेकर शेखर कपूर बने FTII के अध्यक्ष, बेहतरीन फिल्मों का किया निर्देशन

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की प्रेस रिलीज के मुताबिक शेखर का कार्यकाल 3 मार्च 2023 तक रहेगा। फ़िल्म इंस्टीट्यूट को संचालित करने के लिए इसके प्रबंधन को चार भागों में बांटा गया है- फ़िल्म सोसाइटी, गवर्निंग काउंसिल, एकेडमिक काउंसिल और स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी। शेखर इन सभी डिपार्टमेंट को हेड करेंगे। 

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नई दिल्ली: मिस्टर इंडिया और बैंडिट क्वीन जैसी शानदार फिल्म बनाने वाले शेखर कपूर को पुणे स्थित ‘फ़िल्म एंड टेलीविज़न इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया (FTII)’ का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
उन्होंने बीपी सिंह को रिप्लेस किया है। बीपी सिंह को कुछ दिन पहले ही The Indian Council for Cultural Relations (ICCR) की जनरल असेम्बली के लिए नॉमिनेट किया गया था। शेखर कपूर को सोशल मीडिया में जमकर बधाइयां दी जा रही हैं।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की प्रेस रिलीज के मुताबिक शेखर का कार्यकाल 3 मार्च 2023 तक रहेगा। फ़िल्म इंस्टीट्यूट को संचालित करने के लिए इसके प्रबंधन को चार भागों में बांटा गया है- फ़िल्म सोसाइटी, गवर्निंग काउंसिल, एकेडमिक काउंसिल और स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी। शेखर इन सभी डिपार्टमेंट को हेड करेंगे।

भारतीय सिनेमा में शेखर कपूर लीक से हटकर फिल्म बनाने के लिए जाने जाते हैं। शेखर कपूर ने ना सिर्फ़ भारतीय, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सिनेमा इंडस्ट्री में भी अपनी खास पहचान बनाई है, एक मुकाम हासिल किया है। शेखर कपूर के नाम मिस्टर इंडिया, मासूम और बैंडिट क्वीन जैसी फिल्में हैं जो उन्हें दूसरे निर्देशकों से अलग पहचान दिलाती है।

शेखर कपूर जब 22 साल के थे तब वो सीए बन गए थे लेकिन शेखर का मन तो फिल्मों में कुछ क्रिएटिव करने में लगा हुआ था। उनके पिता नहीं चाहते थे कि शेखर फिल्मों में काम करें। लेकिन बावजूद इसके फिल्मों में अपना करियर आजमाया और 1983 में मासूम जैसी संवेदनशील और गंभीर फ़िल्म का निर्देशन किया। मासूम हिंदी सिनेमा की क्लासिक फ़िल्म मानी जाती है।

शेखर कपूर को लोग एक शानदार डायरेक्टर के तौर पर बखूबी जानते हैं लेकिन बहुत कम लोग ऐसे हैं जो ये जानते होंगे कि शेखर हिंदी सिनेमा के लीजेंड देवानंद की बहन के बेटे हैं। 1987 में शेखर ने अनिल कपूर और श्रीदेवी को लेकर मिस्टर इंडिया बनायी, जो हिंदी सिनेमा की पहली साइंस फिक्शन फ़िल्म मानी जाती है।

1994 में शेखर कपूर ने फिल्म बैंडिट क्वीन बनाई। इस फिल्म ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचा दिया। दस्यु सुंदरी फूलन देवी की इस बायोपिक ने दुनियाभर में वाहवाही बटोरी। 1998 में शेखर ने ब्रिटिश फ़िल्म एलिज़ाबेथ बनाकर इंटरनेशनल फ़िल्म इंडस्ट्री में क़दम रखा।

शेखर ने कई फ़िल्मों में एक्टिंग भी की। कमल हासन की विश्वरूपम में वो एक अहम किरदार में नज़र आये थे। इंडियन और इंटरनेशनल फिल्म इडस्ट्री में अपने शानदार सफर के बाद अब शेखर कपूर पर फिल्म इस्टीट्यूट को संभालने की जिम्मेदारी है जिसे वो बखूबी संभालेंगे। शेखर कपूर को प्रताप किरण देता है ढेरों शुभकामनाएं।

 

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