EU ने मॉरिशस को ब्लैक लिस्ट किया, मनी लॉड्रिंग और टेरर फंडिंग का है मामला

123वें नम्बर की GDP वाले देश द्वारा भारत समेत बड़े-बड़े देशों मे पैसा लगाने पर सवाल, FATF के रिकमेंड करने पर EU ने की कार्रवाई, फिलहाल भारत मे सेबी ने वैध करार दिया।

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हिंद महासागर के द्वीपीय देश मॉरीशस आजकल मुसीबत मे है। EU ने मॉरिशस पर मनी लांड्रिंग और आतंकी गतिविधियों के लिए फंडिंग मिलने का आरोप लगाया है। FATF की सिफारिश के बाद से अब EU मॉरिशस को ब्लैक लिस्ट करने जा रहा है। एक अक्टूबर से मॉरिशस समेत और भी देशों को ब्लैक लिस्ट कर दिया जाएगा। इस प्रतिबंध के बाद से कोरोना के दुष्प्रभावों से निजात पाने मे जुटे मॉरिशस को बड़ा झटका लगा है।

हालांकि भारत में शेयर बाजार के रेगुलेटर SEBI ने मॉरीशस को FPI के रूप में भारत में वैध घोषित किया है। लेकिन इसके साथ ही वह इसकी निगरानी भी करेगी।

 

प्रतिबंध की वजह

जानकारों के मुताबिक देश में मॉरीशस की मुखौटा कंपनियों के जरिए से फंड आता है। ऐसा इसलिए क्योंकि वहां टैक्स बचाया जाता है। यह एक तरह से राउंड ट्रिपिंग करते हैं। इसके लिए हवाला और दूसरे चैनलों का उपयोग करते हैं।

एक्सपर्ट कहते हैं कि मॉरीशस में इतना पैसा नहीं है। यहां कोई निवेशक भी नहीं है। मॉरीशस ज्यादतर दक्षिण अफ्रीका और अन्य देशों पर निर्भर है। यहां न तो इंडस्ट्री है, न टेलीकॉम है, न तो टेक्सटाइल्स है। फिर भी यह भारत का आर्थिक सपोर्ट करता है। 2019 मे मॉरीशस की GDP 1,439 करोड़ डॉलर की थी और यह इस लिहाज से दुनिया में 123 वें नंबर पर है।

 

क्या होगा प्रतिबंध का प्रभाव

मॉरीशस को ब्लैकलिस्ट मे डालने से वहाँ की अर्थवयवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

अब EU यहाँ से बिजनेस या Private Equity Fund (FPI) के पैसे को नहीं स्वीकारेगा। इसके अलावा EU में कुल 27 और FATF के कुल 39 सदस्य देश हैं और इसलिए भी मॉरिशस के लिये मुश्किल और भी बढ़ सकती है।

मॉरीशस को ब्लैक लिस्ट में डालने के बाद यहां के निवेशक दूसरे देशों का रूख कर सकते हैं। बैंकों में जमा डिपॉजिट भी निकलनी शुरू हो जाएगी और इससे मुद्रा और महंगाई में बढ़त होगी।

 

मॉरिशस का पक्ष

अगर एक अक्टूबर को ऐसा होता है तो इससे न केवल मॉरीशस की प्रतिष्ठा पर आंच आएगी बल्कि इस द्वीपीय देश का वित्तीय सिस्टम भी बिगड़ जाएगा। गौरतलब है कि कोरोना महामारी के बाद से यह मॉरिशस इसके दुष्प्रभाव से उबरने की कोशिश कर रहा है।

मॉरीशस के फाइनेंशियल सर्विसेस के मंत्री महेन सीरुत्तुन ने कहा कि यह सही है कि EU हमे ब्लैक लिस्ट करने जा रहा है। इस प्रक्रिया में हमारे खिलाफ कई गलतियां की जा रही हैं। इस संबंध में कमीशन ने हमारे साथ कोई चर्चा नहीं की है और न ही कोई असेसमेंट किया है। हमें भी खबरों से ही यह बात पता चली है। EU यह फैसला FATF की सिफारिश पर कर रहा है। साथ ही महेन ने कहा कि इस मामले में हम EU को मनाने में असफल रहे हैं। हमने इस बारे मे कई यूनियन से अपील की थी।

आपको बता दें कि मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद जुगनौथ ने भी जून में EU काउंसिल के प्रेसीडेंट चार्ल्स मिशेल को कॉल किया था। हालाँकि इसका कोई खास प्रभाव नही पड़ा।

वैसे FATF के नियमानुसार यदि मॉरिशस इन गतिविधियों पर नियंत्रण कर पाता है तो इस लिस्ट से बाहर निकल सकता है। FATF की साल मे तीन बैठकें होती है। इनमे सभी देशों की फिर से समीक्षा की जाती है। ऐसे मे मॉरिशस के पास लिस्ट से बाहर निकलने का मौका अभी भी है।

 

क्या भारत मे भी होगी कार्रवाई ?

भारत मे मॉरिशस से पैसा मल्टी लेयर टैक्स हैवेन बैंक के जरिए आता है। इसके पहले एक ट्रस्ट बनाकर छोटे देशों से मॉरीशस में पैसा आता है। हालाँकि भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI- Security and Exchange Board of India) ने मॉरीशस से आने वाले पैसे को वैधता दे दी है।

भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI- Direct Foreign Investment) के मामले में मॉरिशस टॉप के देशों मे से एक है। भारत मे 2019-20 मे 8.26 अरब डॉलर के FDI के साथ मॉरिशस दूसरे नम्बर पर है। 2019-20 के वित्तीय वर्ष मे 14.67 अरब डॉलर निवेश के साथ सिंगापुर पहले नम्बर पर है। ऐसे ही भारत को इसी तरह के छोटे देशों से ज्यादा FDI मिलती है। भारत को केमन आइलैंड से 3.7 अरब डॉलर और नीदरलैंड से 6.5 अरब डॉलर की FDI मिली है।

 

मॉरिशस के साथ और भी देश होंगे ब्लैकलिस्ट

यूरोपियन यूनियन कमीशन से बीते 7 मई को मॉरीशस के साथ और 22 देशों को ब्लैक लिस्ट में डालने की खबर आई थी। यूरोपीय यूनियन (EU) के अनुसार इन सभी देशों से उसकी वित्तीय व्यवस्था को खतरा है।

मॉरीशस के अलावा इस लिस्ट मे अन्य देश भी शामिल हैं। पनामा, बहामास, निकारागुआ, बार्बाडोस, बोत्सवाना, कंबोडिया, घाना, जमैका, मंगोलिया, म्यामार और जिंबाब्वे भी ग्रे लिस्ट में हैं। ये सभी एक अक्टूबर से ब्लैक लिस्ट होंगे। पिछले दो सालों से EU ने FATF की 58 सिफारिशों में से 53 पर अमल किया है।

 

FATF क्या है

1989, जुलाई मे G-7 के पेरिस सम्मेलन मे वित्तीय एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की स्थापना की गई थी। FATF का उद्देश्य मनी लॉन्ड्रिंग से निपटने के उपायों की जांच करना और इसके विस्तार को रोकना, वर्चुअल करेंसी से सम्बंधित मुद्दों पर विचार करना, टेरर फंडिंग और मानव तस्करी से निपटने के प्रयास करना है।

वर्तमान में FATF 37 सदस्य क्षेत्र और 2 क्षेत्रीय संगठन शामिल हैं, जो दुनिया के सभी हिस्सों में सबसे प्रमुख वित्तीय केंद्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं.

 

FATF की ब्लैक लिस्ट और ग्रे लिस्ट

Black List

जो देश आतंकी फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग गतिविधियों का समर्थन करते हैं उन्हें ब्लैक लिस्ट में सूचीबद्ध किया जाता है। इन देशों में मौजूद फाइनेंसियल सिस्टम की मदद से आतंकी गतिविधियों के लिए फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग को बढ़ावा मिलता है।

उन देशों को इस लिस्ट में जोड़ दिया जाता है जो कि टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग की गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए अपने वित्तीय सिस्टम का उपयोग होने देते हैं। इसके साथ ही इसमें उन देशों के नाम हटा भी दिए जाते हैं जो इन गतिविधियों पर रोक लगा देते हैं। लिस्ट अपडेट होती रहती है।

Grey List

इस लिस्ट में उन देशों को शामिल किया जाता है जो कि अपने देश के फाइनेंसियल सिस्टम को टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग की गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए उपयोग नहीं होने देते हैं। फिलहाल मॉरिशस को इसी लिस्ट मे रखा गया है।

यदि कोई देश आतंकी फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग पर अंकुश लगाने में असमर्थ रहता है तो उसे FATF द्वारा ग्रे सूची से ब्लैक सूची में स्थानांतरित कर दिया जाता है।

जब किसी देश को ग्रे लिस्ट में शामिल किया जाता है तो उसे गम्भीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

लिस्ट मे शामिल देश पर अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों (विश्व बैंक, IMF, एशियाई विकास बैंक इत्यादि) और देश आर्थिक प्रतिबंध लगा सकते हैं। अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों और देशों से ऋण प्राप्त करने में समस्या आ सकती है। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में कमी आती है और अर्थव्यवस्था कमजोर होती है।  इसके साथ ही पूर्णरूप से अंतर्राष्ट्रीय बहिष्कार का सामना करना पड़ सकता है।

 

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