Deoghar Ropeway Incident: देवघर में रोपवे हादसे में 24 घंटों से ट्रॉली में फंसे यात्री, बचाव का काम अभी जारी

Deoghar Ropeway Incident: वायु सेना, सीआईएसएफ और एनडीआरएफ के जवान बचाव कार्य में जुटे

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Deoghar Ropeway Incident: झारखंड के देवघर धाम में एक बड़ा हादसा हो गया। बता दें, देवघर से 22 किलोमीटर दूर त्रिकूट में रोपवे की रोप टूटने से अचानक सभी ट्रॉलियां रूक गईं। ये हादसा बीते रविवार की शाम 3.30 बजे हुआ। जब रोपवे की ट्रॉली अचानक रूक गई और जब दो घंटे बीत जाने के बाद भी जब ट्रॉली नहीं चली तब 2000 फीट की उंचाई पर ट्रॉली में फंसे यात्रियों को बताया गया कि ट्रॉली खराब हो गई है।

ट्रॉली में फंसे यात्रियों का कहना है कि जब अचानक ट्रॉली रूकी तब उन्हें लगा कि लाइट चली गई है लेकिन काफी समय बीत जाने के बाद भी जब रोपवे नहीं चला तो ट्रॉली में यात्रियों ने हेल्पलाइन नंबर पर कॉल किया तब जाकर उन्हें बताया गया कि रोपवे में कुछ खराबी आ गई है।

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Deoghar Ropeway Incident: 32 लोगों का हुआ रेस्क्यू 18 लोग अभी भी फंसे

Deoghar Ropeway Incident
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आपको बता दें, सोमवार की सुबह में सीआईएसएफ और एनडीआरएफ के जवान केसुबह मौके पर पुलिस जवान भी पहुंचे, और राहत और बचाव का काम शुरू किया। त्रिकूट में हुए ट्रॉली  हादसे में अब तक 32 लोगों को बचा लिया गया है। रेस्क्यू का काम अभी भी जारी है। प्रशासन से मिली जानकारी के मुताबिक अभी भी 18 लोग ट्रॉली में फंसे हुए हैं। जिन्हें सीआईएसएफ के जवान रस्सी के जरिए और सेना के हेलिकॉप्टर के जरिए रेस्क्यू का काम कर रहे हैं। इस वक्त वायु सेना के और एनडीआरएफ के जवान हादसे वाली जगह पर मौजूद हैं।

Deoghar Ropeway Incident: एनडीआरएफ के जवानों ने क्या कहा

Deoghar Ropeway Incident
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बचाव कार्य में लगें एनडीआरएफ के जवानों को कहना है कि अभी भी 19 नंबर की ट्रॉली में फंसे यात्रियों का रेस्क्यू अभी नहीं हो पाई है। सबसे ज्यादा मुश्किल में 19 नंबर की ट्रॉली ही फंसी है। जिस जगह से जमीन की गहराई बहुत ज्‍यादा है। रेस्‍क्‍यू ऑपरेशन की टीम का कहना है कि ऐसे में इसे जमीन की तरफ से रेस्‍क्‍यू नहीं किया जा सकता है। इस रेस्‍क्‍यू में हेलिकॉप्‍टर से एयर रेस्‍क्‍यू ऑपरेशन चलाना होगा। जिस वजह से रेस्क्यू में समय लग रहा है।

इसके साथ ही बचाव के काम में लगे जवानों का ये भी कहना है कि लोग ट्रॉलियों के अंदर फंसे हैं इसलिए लोगों को बड़ी ही सावधानी के साथ ट्रॉली को खोलकर उन्हें निकालना पड़ रहा है। बचाव काम की रफ्तार इसलिए धीमी है क्योंकि कुछ ट्रॉलियां जहां फंसी हैं वहां तक पहुंचने में परेशानी हो रही है।

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