रावण पर कोरोना का साया, हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं पुतला कारीगर

दिल्ली के तितारपुर में हर साल दशहरे से पहले बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा से कारीगर आकर दिन-रात पुतला बनाने में जुट जाते थे।

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नई दिल्ली: दिल्ली (Delhi) के सबसे बड़े पुतला बाजार (Mannequin market) में रावण (Ravan) ने इस बार दस्तक नहीं दी है। टैगोर गार्डन (Tagore Gardens) से सटे तितारपुर बाजार (Titarpur Market) में पुतला कारोबारियों (Mannequin traders) में मायूसी (Despair) नजर आ रही है। हर साल इस बाजार में इस समय रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले बनने शुरू हो जाया करते थे। तितारपुर में इन दिनों सड़क के किनारे, फुटपाथ, पार्को और छतों पर पुतला बनाने वाले कारीगर व्यस्त नजर आते थे, लेकिन इस बार नजारा बिल्कुल बदला हुआ है।

कोविड-19 से परेशान कारोबारियों को इस बार एक अच्छे कारोबार की उम्मीद थी, क्योंकि पिछले साल पटाखों पर रोक लगने के चलते कई जगह रावण दहन नहीं हुआ था। इस वजह से कारोबारियों को नुकसान झेलना पड़ा था।

प्रधानमंत्री द्वारा राममंदिर के लिए भूमिपूजन किए जाने के बाद पुतला कारोबारियों में उम्मीद जागी थी कि इस बार दशहरा का त्योहार भव्य तरीके से आयोजित होगा, लेकिन नहीं हुआ।

दिल्ली के तितारपुर में हर साल दशहरे से पहले बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा से कारीगर आकर दिन-रात पुतला बनाने में जुट जाते थे।

कारोबारियों के अनुसार, दिल्ली में करीब हजारों की संख्या में हर साल रावण का पुतला फूंका जाता रहा है, लेकिन इस बार कारोबारियों को एक भी ऑर्डर नहीं मिला है। जिसकी वजह से सभी कारीगर हाथ पर हाथ धरे बैठे हुए हैं।

हालांकि दिल्ली में हर साल सबसे ज्यादा रावण दहन किए जाते हैं, लेकिन कोरोना वायरस के चलते यह कह पाना थोड़ा मुश्किल है कि सरकार दशहरे पर रावण दहन करने की इजाजत देगी या नहीं।

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