बिहार में रहेगी कठिन चुनावी लड़ाई, राजद 85 सीटों के साथ बन सकती है सबसे बड़ी पार्टी

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल युनाइटेड (जदयू) पर 15 साल की एंटी-इंनकंबेंसी का प्रतिकूल प्रभाव पड़ता दिख रहा है।

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नई दिल्ली:  बिहार विधानसभा चुनाव में किसी भी पार्टी या गठबंधन की ओर से बड़े अंतर से चुनावी जीत हासिल होती नहीं दिख रही है, जहां शनिवार को अंतिम चरण का मतदान संपन्न हुआ है। प्रदेश में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) 85 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर सामने आ सकती है, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) भी उससे काफी पीछे नहीं रहेगी, जिसे 70 सीटें मिलने का अनुमान है।

राजद की ओर से कुल सीटों पर लड़ी गई चुनावी लड़ाई में 59 प्रतिशत की स्ट्राइक रेट (सीट के हिसाब से दर्ज जीत) हासिल करने की संभावना है। वहीं 110 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली भाजपा को 63.6 प्रतिशत की स्ट्राइक रेट के साथ 70 सीटें मिलने का अनुमान है।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल युनाइटेड (जदयू) पर 15 साल की एंटी-इंनकंबेंसी का प्रतिकूल प्रभाव पड़ता दिख रहा है, जिसे 115 सीटों में से महज 42 सीट मिलने का अनुमान है। इस लिहाज से पार्टी केवल 36.5 प्रतिशत का स्ट्राइक रेट हासिल करती दिख रही है।
इसके अलावा 70 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस 25 सीटों पर जीत दर्ज करती दिख रही है। कांग्रेस का स्ट्राइक रेट 35.7 प्रतिशत रहने की संभावना है।

चुनावी मैदान में मार्जिनल सीटों पर राजनीतिक दलों का मूल्यांकन करें तो मार्जिन ऑफ विक्ट्री तीन प्रतिशत कम रहने की संभावना है। यह स्पष्ट है कि विपक्षी गठबंधन – राजद, कांग्रेस और वाम दलों को ऐसी 46 सीटों पर मार्जिन मिल सकता है। जबकि राजग के पास 29 मार्जिनल सीटें रहने की संभावना है। इसका मतलब यह भी है कि महज 1.5 प्रतिशत वोटों से इन सीटों के परिणाम बदल सकते हैं।

इन मार्जिनल सीटों पर उपविजेता के पहलू से देखा जाए तो भाजपा 16, जदयू 28, राजद 14 और कांग्रेस के पास 8 सीटों पर रहने की संभावना है।

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