Article of this week: छल-कपट से भरा व्यक्ति मोक्ष की मंजिल को प्राप्त नहीं कर सकता

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“सरल सुभाव न मन कुटिलाई। जथा लाभ संतोष सदाई”

तुलसीदास जी कहते हैं कि,

कहहु भगति पथ कवन प्रयासा। जोग न मख जप तप उपवासा।

सरल सुभाव न मन कुटिलाई। जथा लाभ संतोष सदाई।।

भावार्थ

कहो तो, भक्ति मार्ग में कौन-सा परिश्रम है? इसमें न योग की आवश्यकता है, न यज्ञ, जप, तप और उपवास की! (यहाँ इतना ही आवश्यक है कि) सरल स्वभाव हो, मन में कुटिलता न हो और जो कुछ मिले उसी में सदा संतोष रखे।।

Article of this week: छल-कपट से भरा व्यक्ति मोक्ष की मंजिल को प्राप्त नहीं कर सकता।

एक किस्सा है कि मुम्बई रेलवे स्टेशन पर ट्रेन पकड़ने के लिए चार दोस्त गए। ट्रेन में भीड़ बहुत थी। एक मित्र ने कहा कि आज यात्रा मत करिए, दूसरे ने कहा कि नहीं चलना तो आज ही चाहिए, तीसरे ने कहा कि तरीका क्या है, इसमें तो खड़े खड़े चलना पड़ेगा, तब चौथे मित्र ने कहा कि तरीका तो मेरे पास है। वह दूर जाकर दौड़ते हुए ट्रेन के  एक डिब्बे के गेट पर खड़े यात्रियों को धक्का मारते हुए बोला कि भागो-भागो इस डिब्बे में काला सांप घुस गया है।

इतना सुनना था कि डिब्बे में भागम भाग मच गई। लोग उस डिब्बे से उतर गए। टीटीई आया,पूछा कि क्या हुआ? लोग बोले कि इस डिब्बे में सांप है। इसलिए हम लोग खाली कर दिए। डिब्बा खाली हो जाने पर चारों मित्र ऊपर की बर्थ पर सो गए कि अब तो सुबह अहमदाबाद पहुंचने पर उतरना है।

रात भर चारों मित्र चैन की नींद सोए और जब सुबह हुई तो बाहर झांककर देखा तो पता चला कि वह लोग तो मुम्बई के स्टेशन पर ही हैं। चारो महाधिराज डिब्बे से बाहर निकलकर देखते हैं कि यह एक ही डिब्बा जो यहां खड़ा है। और ट्रेन तो यहां है नहीं। इस बारे में एक वेंडर से पूछा तो उसने बताया कि रात में इस डिब्बे में सांप था इसलिए स्टेशन मास्टर ने इस डिब्बे को यहीं काट दिया और बाकी ट्रेन चली गई।

Article of this week: ‘दिल में कपट का काला सांप घुसा हुआ हो तो उसकी बोगी यहीं कट जाएगी’

इस किस्से का अर्थ यही है कि ऐसे किसी के दिल में कपट का काला सांप घुसा हुआ हो तो उसकी बोगी यहीं कट जाएगी, परलोक तक जाएगी ही नहीं। इसीलिए प्रभु श्री राम कहते है कि “सरल सुभाव न मन कुटिलाई। जथा लाभ संतोष सदाई।।”

कुटिलता से किसी का हड़प सकते हो, उसे दुःख पहुंचा सकते हो, पर उस निरीह की आत्मा आपको माफ नहीं करेगी। इसलिए आप की बोगी यहीं रह जाएगी। मोक्ष का मार्ग तो दूर, प्रेतयोनि में ही रहना पड़ेगा। शास्त्र कहता है कि जो चर्चा में बना रहता है समझिए वह सद्गति से चूक गया है और जिसकी चर्चा नहीं होती वह सद्गति को प्राप्त कर लिया है।

लेखक- पीके सिंह

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