विपक्ष के हंगामे के बीच रास में कृषि से जुड़े 2 बिल पास, सांसद ओ’ब्रायन ने स्पीकर की माइक तोड़ने की की कोशिश

विपक्ष के हंगामे के बीच रास में कृषि से जुड़े 2 बिल पास, सांसद ओ’ब्रायन ने स्पीकर की माइक तोड़ने की की कोशिश

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विपक्ष के जोरदार हंगामे के बीच सरकार ने राज्यसभा से खेती से जुड़े दो बिल फार्मर्स एंड प्रोड्यूस ट्रेड एंड कॉमर्स (प्रमोशन एंड फैसिलिटेशन) बिल और फार्मर्स (एम्पावरमेंट एंड प्रोटेक्शन) एग्रीमेंट ऑन प्राइस एश्योरेंस एंड फार्म सर्विस बिल ध्वनि मत से पास करा लिया।

विपक्षी सांसदों ने वेल में जाकर जमकर नारेबाजी की। तृणमूल सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने उपसभापति हरिवंश का माइक तोड़ने की कोशिश की। साथ ही ब्रायन ने सदन की रूल बुक भी फाड़ दी। इस अराजकता के बीच सदन की कार्यवाही जारी रखने के लिए मार्शलों को बुलाना पड़ा। 10 मिनट तक सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद दोनो बिल पास करा लिये गये।

 

कृषि मंत्री बोले, बिल का MSP से कोई संबंध नही

कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने दोनों बिलों को ऐतिहासिक और किसानों की जिंदगी बदलने वाला बताया। उन्होने बताया कि बिल के पास होने के बाद किसान देशभर में कहीं भी अपना अनाज बेच सकेंगे। मैं आपको आश्वासन डेटा हूँ कि इन बिलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से कोई भी संबंध नहीं है।

 

समर्थन की कम, विरोध की आवाजें ज्यादा

बिल को राज्यसभा मे चर्चा के लिये रखने पर सरकार को तीखी प्रतिक्रियाएं मिली। राहुल गाँधी ने कहा कि प्रधानमंत्री इस कदम से किसानों को गुलाम बनाना चाहते हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री और आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने भी इस बिल विरोध किया। उन्होने ट्वीट करके विपक्षी दलों से बिल का समर्थन न करने की अपील की। सदन मे चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद ‘प्रताप सिंह बाजवा’ ने इन बिलों को किसानों का डैथ वारंट तक करार दे दिया। बाजवा ने कहा कि कांग्रेस किसानों के डेथ वॉरंट पर साइन नहीं करेगी।

 

सदन में क्या रहा अन्य पार्टियों का स्टैंड

भाजपा सांसद भूपेंद्र यादव ने कांग्रेस से पूछा कि जब उनकी सरकार थी तो साल दर साल ग्रामीण क्षेत्रों की आय क्यों कम हुई? आप इस बिल का क्यों विरोध कर रहे हैं?

संसद मे अपनी कविता के लिये मशहूर केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (RFI) की तरफ से बिल का स्वागत करते हुए कहा कि, आज के दिन इस बिल के पास होने से किसानों को न्याय मिल जायेगा।

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) से सांसद पीपी रेड्‌डी ने कांग्रेस पर गम्भीर आरोप लगा दिया। रेड्डी ने सदन में कहा कि कांग्रेस के पास इस बिल के विरोध का कोई कारण नहीं है। कांग्रेस दलालों के साथ खड़ी है। उन्‍होंने कांग्रेस का चुनावी घोषणापत्र का भी जिक्र किया, जिसमे यही वादे किए गये थे जिन्हें भाजपा ने इस बिल में शामिल किया है। रेड्‌डी के इस बयान पर कांग्रेस बिफर पड़ी और सदन मे हंगामा शुरू कर दिया।

आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद संजय सिंह ने कहा ये काला कानून है। इस बिल के जरिये देश के किसानों को धोखा दिये जाने का काम किया जा रहा हैं। यह बिल देश के किसानों को आत्मा बेचने पर मजबूर कर देगा।

शिवसेना सांसद संजय राउत ने सरकार पर तीखे तंज कसे। प्रधानमंत्री के किसानों की आय दुगुनी करने वाले बयान पर चुटकी लेते हुए उन्होंने पूछा कि क्या सरकार यह बतायेगी कि कैसे इस बिल को लागू करने के बाद किसानों की आय दोगुनी हो जाएगी? क्या अब किसान आत्महत्या नहीं करेंगे? क्या अब उनके बच्चे भूखे नहीं नहीं रहेंगे?

बसपा (BSP) के सांसद सतीश चंद्र मिश्र ने कहा कि किसान MSP को लेकर संशय में हैं। उन्हें डर है कि कहीं ये MSP खत्म तो नहीं हो जाएगी। सरकार को इन मुद्दों को साफ कर देना चाहिए। इसके अलावा सरकार यह भी स्पष्ट करे कि मंडी समिति में पूर्व की तरह बिक्री जारी रहेगी या नहीं।

NDA मे भाजपा के सहयोगी दल शिरोमणि अकाली दल (SAD) से सांसद नरेश गुजराल ने बिल को वापस सिलेक्ट कमेटी के पास भेजने की मांग की। उनके अनुसार इस बिल में कई खामियां हैं। इसे बिल से जुड़े सभी लोगों से चर्चा करने के बाद ही पास किया जाना चाहिये।

द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) सांसद टीकेएस एलंगोवन ने भी इन कृषि विधेयकों का विरोध किया। उन्होंने कहा, देश की GDP में कम से कम 20% का योगदान किसानों का है। नया बिल किसानों को समाप्त कर देगा और उन्हें एक वस्तु बना देगा।

समाजवादी पार्टी (SP) के सांसद राम गोपाल यादव ने कहा कि इस बिल को रखने से पहले किसानों के किसी संगठन से चर्चा नहीं की गई। लगता है भाजपा इन बिल पर चर्चा ही नहीं चाहती है। ये केवल इन बिल को पास कराने के लिए इसे पेश कर रहे हैं।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने भी प्रधानमंत्री के किसानों की आय दुगुनी करने वाली बात पर खिंचाई की। ब्रायन ने कहा कि प्रधानमंत्री ने 2022 तक किसानों की इनकम डबल करने का वादा किया था। फिलहाल तो मौजूदा दर के हिसाब से तो 2028 तक इसकी कोई सम्भावना नही दिखती। प्रधानमंत्री के वादों से उनकी विश्वसनीयता कम होती जा रही है।

माकपा, तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक ने इन सभी विधेयकों में संशोधन करने की मांग की। इसके साथ ही इन्होने बिलों को राज्यसभा की सिलेक्ट कमेटी के पास भेजने की भी माँग की।

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