महान अभिनेता गुरू दत्त के जीवन पर यह नेशनल अवार्डी निर्देशक बना रहीं हैं फ़िल्म

महान अभिनेता गुरू दत्त पर प्यासा नाम से बन रही है फ़िल्म, स्क्रिप्ट पूरी अब कास्टिंग की हो रही है तैयारी

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महान निर्देशक-अभिनेता गुरू दत्त, जिन्हे भारतीय सिनेमा का कवि भी कहा जाता है, के जीवन पर नेशनल अवार्ड विजेता ‘भावना तलवार’ ने फिल्म बनाने की घोषणा की है। इस फिल्म का नाम ‘प्यासा’ होगा जो 1957 मे आई उनकी सबसे बेहतरीन फ़िल्म का भी नाम है।

1950 के दशक मे गुरू दत्त भारतीय सिनेमा के सबसे बेहतरीन निर्देशक, निर्माता और अभिनेताओं में से एक थे। उनकी फिल्में ‘प्यासा’ और ‘कागज के फूल’ को टाइम पत्रिका ने सर्वकालिक महान फिल्मों में शुमार किया है।

गुरू दत्त की अन्य बेहतरीन फ़िल्मों मे ‘चौदवीं का चाँद’, ‘मिस्टर और मिसेस 55’, ‘आर-पार’, ’12 ओ क्लॉक’, ‘भरोसा’, ‘बाजी’, और ‘सीआईडी’ शुमार है।

 

भावना तलवार बॉलीवुड की एक जानी-मानी निर्देशक हैं जिनकी फ़िल्म ‘धर्म’ के लिए उन्हें नेशनल अवार्ड मिल चुका है। 2007 मे आई यह फिल्म उन्होंने पंकज कपूर के साथ बनाई थी। हाल ही मे उन्होने गुरुदत्त पर फिल्म बनाने की घोषणा की। फ़िल्म के स्क्रिप्ट का काम हो चुका है और अब इसकी कास्टिंग की तैयारी की जा रही है।

 

गुरू दत्त के बारे मे बताते हुए उन्होने कहा,

“वह एक ‘लार्जर-दैन-लाइफ’ व्यक्तित्व थे। 10 वर्षों के भीतर उन्होंने सब कुछ देखा था – एक सफ़ल फिल्म निर्माता, अभिनेता, अपने सिनेमा की व्यावसायिक सफलता, एक अभिनेता के रूप में अपने प्रशंसकों की प्रशंसा और साथ ही उन्होनें एक सह-कलाकार और पत्नी के रूप मे गीता दत्त का भी साथ पाया। इसके साथ ही उनके जीवन मे उदासी भी है। इसलिए आप इसे छोटे पर्दे में नहीं बांध सकते। यह एक फीचर फिल्म प्रारूप के योग्य है।”

 

कहानी को वेब सिरीज़ के रूप मे न कहने के पीछे भावना तर्क देतीं हैं-

“इस कहानी को कहने के लिये 10 घण्टे जरूरी नहीं है। उनकी यात्रा आकर्षक है और इसे बड़े पर्दे पर उतारने की आवश्यकता है। विस्तृत शोध कार्य के लिए मुझे सात साल लग गए और एक आकर्षक कहानी खोजने के लिए कई बातचीत हुई। यह कहानी न सिर्फ मुझे और मेरी टीम के लिये, बल्कि नई पीढ़ी के उन दर्शकों के लिये भी दिलचस्प है जो ये फिल्म देखने के लिए थिएटर जाने वाले हैं।”

 

क्लासिक सिनेमा के दीवानों और गुरू दत्त के प्रशंसकों के लिये ये एक बहुत बड़ी सौगात है। अब देखना होगा कि एक बेहतरीन और ट्रैजडी से भरपूर व्यक्तित्व की कहानी के साथ भावना कितना न्याय कर पाती हैं।

 

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